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आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता और वृद्धि की चर्चा कीजिए।

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प्रश्न

आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता और वृद्धि की चर्चा कीजिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

किसी देश के आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता का मापन उसके अंतर्गत होने वाले विभिन्न क्रियाकलापों के विकास के स्तर का आकलन करने के बाद ही संभव हो सकता है। सेवा सेक्टर के अंतर्गत होने वाले क्रियाकलाप निम्नलिखित हैं

  1. वाणिज्य और व्यापार-इसके दो स्तर हैं – 1. फुटकर व्यापार तथा 2. थोक व्यापार।
    इसमें फुटकर विक्रेता तथा थोक विक्रेता, चाहे वे ग्रामीण परिवेश से संबंधित हैं अथवा शहरी परिवेश से, सभी का उद्देश्य वस्तुओं/उत्पादों को बेचकर लाभ कमाना होता है। किसी देश में व्यापार और वाणिज्य में विशेष रूप से आधुनिक विनिर्मित वस्तुओं के क्रय एवं विक्रेय में, जितनी अधिक वृद्धि होगी, विकास का स्तर उतना ही ऊँचा होगा।
  2. परिवहन और संचार सुविधाएँ – परिवहन के द्वारा व्यक्तियों, वस्तुओं व संपत्तियों को प्रत्यक्ष रूप में अपने गंतव्यों तक पहुँचाना होता है जबकि संचार की सुविधाओं के द्वारा शब्दों, विचारों व संदेशों को चाहे वे लिखित सामग्री के रूप में हैं अथवा श्रृंव्य-दृश्य के रूप में उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे-डाक सेवाओं द्वारा, दूरसंचार सेवाएँ (मोबाइल, फैक्स, इंटरनेट, रेडियो व दूरदर्शन) के द्वारा अथवा लिखित सामग्री (समाचार पत्र व पत्रिकाओं) के द्वारा-ये सभी जनसंचार के आधुनिक साधन हैं। इनका जितना अधिक विकास होगा, और लोग इनका जितना अधिक-से-अधिक उपयोग करेंगे देश उतना ही अधिक विकसित होगा।
  3. व्यावसायिक कुशलता, अनुसंधान व उच्च प्रौद्योगिकी का निष्पादन – देश में साधारण सेवाओं के अलावा व्यावसायिक रूप से कुशल व प्रशिक्षित शिक्षक, डॉक्टर, वकील, लेखाकार, परामर्शदाता वैज्ञानिक, शोधकर्ता, प्रशासनिक कुशलता रखने वाले लोगों की संख्या तथा उच्च प्रौद्योगिकी पेशेवरों की संख्या जितनी अधिक होगी तथा उनको कार्यस्थलों का जितना विकास होगा, देश उतना ही विकसित कहलाता है। विकसित देशों में तृतीयक क्रियाकलापों में संलग्न जनसंख्या का प्रतिशत अधिक होता है।
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तृतीयक क्रियाकलापों के प्रकार
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पाठ 6: तृतीयक और चतुर्थ क्रियाकलाप - अभ्यास [पृष्ठ ६२]

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एनसीईआरटी Manav Bhugol Ke Mul Sidhant [Hindi] Class 12
पाठ 6 तृतीयक और चतुर्थ क्रियाकलाप
अभ्यास | Q 3. (i) | पृष्ठ ६२
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