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प्रश्न
10 cm लम्बाई और 10-3 m2 अनुप्रस्थ काट के एक क्षेत्र में 100 G (1G = 10-4) का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र चाहिए। जिस तार से परिनालिका का निर्माण करना है उसमें अधिकतम 15 A विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है और क्रोड पर अधिकतम 1000 फेरे प्रति मीटर लपेटे जा सकते हैं। इस उद्देश्य के लिए परिनालिका के निर्माण का विवरण सुझाइए। यह मान लीजिए कि क्रोड लौह-चुम्बकीय नहीं है।
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उत्तर
माना परिनालिका की एकांक लम्बाई में फेरों की संख्या n तथा उसमें प्रवाहित धारा 1 है तब उसकी अक्ष पर केन्द्रीय भाग में
चुम्बकीय क्षेत्र B = `mu_0 "ni" => "ni" = "B"/mu_0`
B = 100 × 10-4 T नियत है तथा `mu_0` भी नियतांक है।
दी गई परिनालिका के लिए ni = नियतांक
इस प्रतिबन्ध में दो चर राशियाँ हैं; अत: हम किसी एक राशि को दी गई सीमाओं के अनुरूप स्वेच्छ मान देकर दूसरी राशि का चुनाव कर सकते हैं।
इससे स्पष्ट है कि अभीष्ट परिनालिका के बहुत से भिन्न-भिन्न विवरण सम्भव हैं।
`because "ni" = "B"/mu_0 = (100 xx 10^-4)/(4pi xx 10^-7) = 7.96 xx 10^3`
∵ दिया है, i ≤ 15 A
अतः i = 10 A लेने पर (आप अन्य मान भी चुन सकते है)
n = `(7.96 xx 10^3)/10 = 796 ~~ 800`
हम जानते हैं कि परिनालिका की अक्ष पर उसके केन्द्रीय भाग में चुम्बकीय क्षेत्र लगभग एकसमान होता है। अतः दिया गया स्थान (10 cm लम्बा व 10-3 m2 अनुप्रस्थ क्षेत्रफल वाला) परिनालिका की अक्ष के अनुदिश तथा केन्द्रीय भाग में होना चाहिए।
अत: परिनालिका की लम्बाई लगभग 50 cm से 100 cm के बीच (10 cm से काफी अधिक) होनी चाहिए तथा परिनालिका का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल 10-3 m2 से अधिक होना चाहिए।
माना परिनालिका की त्रिज्या r है, तब
`pi"r"^2 > 10^-3 => "r"^2 > 10^-3/3.14 = 3.18 xx 10^-4`
`"r" > 1.78 xx 10^-2 "m"` या r > 1.78 cm
अतः हम परिनालिका की त्रिज्या 2 cm से अधिक (माना 3 cm) ले सकते हैं।
अतः परिनालिका का विवरण निम्नलिखित है :
लम्बाई l = 50 cm लगभग, फेरों की संख्या N = nl = 800 x 0.5 = 400 लगभग
त्रिज्या r = 3 cm लगभग, धारा i = 10 A
