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निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:
उन्हें व्यवस्थित करने की सभी प्रयास निष्फल रहा हैं।
Concept: वाक्य शुद्धीकरण
निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:
दिलीप उच्च शिक्शा के लिए लंदन चली गया।
Concept: वाक्य शुद्धीकरण
निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:
तापमान बडने से ध्रुवों पर जमी हुई विशाल बर्फ राशी पिघलने के समाचार भी आ रहे हैं।
Concept: वाक्य शुद्धीकरण
Concept: वाक्य शुद्धीकरण
निम्नलिखित मुहावरे का अर्थ लिखकर उचित वाक्य में प्रयोग कीजिए:
फलीभूत होना।
Concept: मुहावरे और कहावतें
निम्नलिखित मुहावरे का अर्थ लिखकर उचित वाक्य में प्रयोग कीजिए:
हवा लगना
Concept: मुहावरे और कहावतें
निम्नलिखित मुहावरे के अर्थ लिखकर उचित्त वाक्य में प्रयोग कीजिए:
शक्ल पर बारह बजना।
Concept: मुहावरे और कहावतें
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
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रविशंकर जी भारत के जाने-माने सितार वादक व शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं। उन्होंने बोटल्स व विशेष तौर पर जॉर्ज हैरीसन के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय संगीत को, विदेशों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनका जन्म ०७ अप्रैल, १९२० को वाराणसी में हुआ। उनके बड़े भाई उदयशंकर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय नर्तक थे। प्रारंभ में रविशंकर जी उनके साथ विदेश यात्राओं पर जाते रहे व कई नृत्य-नाटिकाओं में अभिनय भी किया। १९३८ में उन्होंने नृत्य कों छोड़कर संगीत को अपना लिया व मेहर घराने के उस्ताद अलाउद्दीन खाँ से सितार वादन का प्रशिक्षण लेने लगे। १९४४ में अपनो प्रशिक्षण समाप्त करने के बाद, उन्होंने आई. पी. टी. ए. में दाखिला लिया व बैले के लिए सुमधुर धुनें बनाने लगे। वे ऑल इंडिया रेडियो में वाद्यवृंद प्रमुख भी रहे। १९५४ में उन्होंने सर्वप्रथम सोवियत यूनियन में पहला विदेशी प्रदर्शन दिया। फिर एडिनबर्ग फेस्टिवल के अतिरिक्त रॉयल फे. स्टिवल हॉल में भी प्रदर्शन किया। १९६० के दर्शक में ब्रीटल्स के साथ काम करके उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की धूम विदेशों तक पहुँचा दी। वे १९८६ से १९९२ तक राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे। १९९९ में उन्हें भारतरत्न से सम्मानित, किया गया। उन्हें पद्मविभूषण, मैग्सेसे, ग्रेमी, क्रिस्टल तथा फूकुओका आदि अनेक पुरस्कार भी प्राप्त हुए। उनकी पुत्री अनुष्का का जन्म १९८२ में, लंदन में हुआ। अनुष्का का पालन-पोषण दिल्ली व न्यूयार्क में हुआ। अनुष्काने पिता से सितार वादन सीखा व अल्प आयु में ही अच्छा कैरियर बना लिया। वे बहुप्रतिभाशाली कलाकर हैं। उन्होंने पिता को समर्पित करते हुए एक पुस्तक लिखी- ‘बापी, द लव ऑफ माई लाईफ।’ इसके अतिरिक्त उन्होंने एक फिल्म में भरतनाट्यम नर्तकी का रोल भी अदा किया। पंडित रविशंकर जी ने अनेक नए रागों की रचना की। सन् २००० में उन्हें तीसरी बार ग्रेमी-पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पंडित जी ने सही मायने में पूर्व तथा पश्चिमी संगीत के मध्य एक से हेतु कायम किया है। दिसंबर २०१२ में उनका स्वर्गवास हुआ। |
(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)
रविशंकर जी को प्राप्त पुरस्कार
| (१) | |
| ↓ | |
| (२) | |
| ↓ | |
| (३) | |
| ↓ | |
| (४) |
(२) निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिवर्तन कीजिए: (२)
- नर्तक - ______
- माता - ______
- पंडिताईन - ______
- पुत्र - ______
(३) ‘संगीत का जीवन में महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
Concept: अपठित गद्यांश
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
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एक बार अंग्रेजी के मशहूर साहित्यसेवी डॉ. जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस जाहिर करने लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता। “क्यों?” डॉ. जॉनसन ने फौरन पूछा। “आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।” “पर यह बात सब ही के लिए लागू है।” डॉ. जॉनसन ने कहा। “और करीब आठ ही घंटे ऑफिस में काम करना पड़ता है।” “और बाकी आठ घंटे?” डॉ. जॉनसन ने पूछा। “इन्हीं आठ घंटों में खाना-पीना, हजामत बनाना, नहाना-धोना, ऑफिस आना-जाना, मित्रों से मिलना-जुलना, चिट्ठी-पत्री का जबाब देना, इत्यादि कितने काम रहते हैं। मैं तो बड़ा परेशान हूँ।” “तब तो मुझे भी अब भूखों मरना पड़ेगा।” डॉ. जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले। “क्यों? क्यों?” उनके मित्र ने तुरंत पूछा। “मैं काफी खाने वाला आदमी हूँ और अन्न उपजाने के लिए दुनिया में एक चौथाई ही तो जमीन है, तीन-चौथाई तो पानी ही है और संसार में मेरे जैसे करोड़ों लोग हैं जिन्हें अपना पेट भरना पड़ता है।” “पर इतने लोगों के लिए फिर तो भी जमीन काफी है।” “काफी कहाँ है? इस एक-चौथाई जमीन में कितने पहाड़ हैं, ऊबड़-खाबड़ स्थल हैं, नदी-नाले हैं, रेगिस्तान और बंजर भूमि हैं। अब मेरा भी कैसे निभ सकेगा भगवान! मित्र महोदय बड़ी हमदर्द के साथ डॉ. जॉनसन को दिलासा देने लगे कि उन्हे परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। दुनिया में करोड़ों लोग रहते आए हैं और उन्हें सदा अन्न मिलता ही रहा है।” |
(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

(२) परिच्छेद में आए हुए शब्दयुग्म के कोई भी चार उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए: (२)
- ______
- ______
- ______
- ______
(३) ‘समय अनमोल है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
Concept: अपठित गद्यांश
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
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सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बाद शनि ग्रह की कक्षा है। शनि सौरमंडल का दूसरा बड़ा ग्रह है। यह हमारी पृथ्वी के करीब 750 गुना बड़ा है। शनि के गोले का व्यास 116 हज़ार किलोमीटर है; अर्थात्, पृथ्वी के व्यास से करीब नौ गुना अधिक। सूर्य से शनि ग्रह की औसत दूरी 143 करोड़ किलोमीटर है। यह ग्रह प्रति सेकंड 9.6 किलोमीटर की औसत गति से करीब 30 वर्षों में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। अत: 90 साल का कोई बूढ़ा आदमी यदि शनि ग्रह पर पहुँचेगा, तो उस ग्रह के अनुसार उसकी उम्र होगी सिर्फ तीन साल! हमारी पृथ्वी सूर्य से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। तुलना में शनि ग्रह दस गुना अधिक दूर है। इसे दूरबीन के बिना कोरी आँखों से भी आकाश में पहचाना जा सकता है। पुराने ज़माने के लोगों ने इस पीले चमकीले ग्रह को पहचान लिया था। प्राचीन काल के ज्योतिषियों को सूर्य, चंद्र और काल्पनिक राहु-केतु के अलावा जिन पाँच ग्रहों का ज्ञान था उनमें शनि सबसे अधिक दूर था। शनि को 'शनैश्वर' भी कहते हैं। आकाश के गोल पर यह ग्रह बहुत धीमी गति से चलता दिखाई देता है, इसीलिए प्राचीन काल के लोगों ने इसे 'शनैःचर नाम' दिया था। 'शनैःचर' का अर्थ होता है - धीमी गति से चलने वाला। |
- तालिका पूर्ण कीजिए: [2]
प्राचीन ज्योतिषियों को इन ग्रहों का ज्ञान था। ↓ ↓ ↓ ↓ - परिच्छेद में आए हुए शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए: [2]
- शनि - ______
- दूरबीन - ______
- पृथ्वी - ______
- आकाश - ______
- 'अंतरिक्ष यात्रा' इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
Concept: अपठित गद्यांश
खालील उताऱ्याच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा:
|
वेग हे गतीचे एक रूप आहे. आपले जीवनही स्थिती आणि गती यांत विभागलेली आहे. थांबणे, चालणे, धावणे असे हे जीवनचक्र फिरतच असते. आपल्या विचारांनाही गती असते, जिला आपण प्रगती म्हणतो. ती विचारांची गती असते. गतीला जेव्हा दिशा असते तेव्हाच ती प्रगती या संज्ञेला पात्र ठरते. दिशाविहीन गती ही अधोगती ठरते. आजच्या जीवनात विलक्षण वेगवानता आढळते. रस्ते वाहनांनी व्यापलेले असतात. माणसे घरांत राहतात म्हणूनच अल्पकाळ तरी स्थिर राहतात. एरवी गतीपायी अगतिक होतात. अहोरात्र भरारणारी आणि थरारणारी वाहने पाहिली म्हणजे आश्चर्य वाटते. ही आली कोठून? आली कशी आणि कशासाठी? पूर्वी देशोदेशींचा इतिहास घडला. लोकांनी जगप्रवासही केला; पण आजच्या एवढी अवखळ वाहने कोठे दिसत नसत. आता माणूस घरातून दारात आला, की वाहनावर आरूढ होतो. वेळ थोडा असतो. कामे बरीच असतात. पायी चालत ती उरकता येत नाहीत. जीवन हे दशदिशांना विभागलेले आहे. मुलांची शाळा एका टोकाला, आपले कार्यालय दुसऱ्या टोकाला, मंडई एका बाजूला तर दवाखाना दूर, कुठल्यातरी दिशेला. जीवनाची ही टोके साधणार कशी? जोडणार कशी? शेवटी गती ही घ्यावीच लागते. यथाप्रमाण गती ही गरज आहे; पण अप्रमाण, अवास्तव आणि अनावश्यक गती ही एक विकृती आहे. आपली कामे यथासांग पार पाडावीत, एवढा वेग जीवनाला असावा. त्यापेक्षा अधिक वेग म्हणजे अक्षम्य आवेग म्हणावा लागेल. तो आत्मघातकी ठरतो. |
(१) चौकटी पूर्ण करा - (२)
(य) विचारांची गती म्हणजे - ______
(र) दिशाविहीन गती म्हणजे - ______
(२) कारणे लिहा - (२)
माणूस घरातून दारात आला, की वाहनावर आरूढ होतो, कारण ______
(य) ______
(र) ______
(३) स्वमत अभिव्यक्ती -
'यथा प्रमाण गती ही गरज आहे' - हे विधान तुमच्या शब्दांत स्पष्ट करा. (४)
किंवा
वाहन चालवत असताना कोणती काळजी घ्यावी, ते सविस्तर लिहा.
Concept: वेगवशता
खालील ओळींचा अर्थ लिहा:
|
सरी-वाफ्यात, कांदं लावते काळ्या आईला, हिरवं गोंदते |
Concept: रोज मातीत
खालील कवितेच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा.
(१) कवितेतील स्त्री करत असलेली विविध कामे - (२)
(य) ______
(र) ______
(२) खालील अर्थाच्या ओळी कवितेतून शोधून लिहा - (२)
(य) गोंदणाच्या हिरव्या नक्षीप्रमाणे शेत पिकाने सजवते. (१)
(र) स्वतःचा जीवच जणू कांद्याच्या रोपाच्या रूपात लावते. (१)
|
सरी-वाफ्यात, कांदं लावते फुलं सोन्याची, झेंडू तोडते ऊस लावते, बेणं दाबते उन्हातान्हात, रोज मरते |
(३) अभिव्यक्ती - (४)
कुटुंबाच्या उदरनिर्वाहाकरिता कष्टकरी शेतकरी स्त्रीचे योगदान स्पष्ट करा.
Concept: रोज मातीत
खालील उताऱ्याच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा.
(१) लेखकाने सांगितलेल्या आनंदाच्या गंमती - (२)
(य) ______
(र) ______
(२) (य) आनंदाविषयी उताऱ्यात आलेली काव्यपंक्ती - (१)
(र) प्रस्तुत काव्यपंक्तीविषयी लेखकाने व्यक्त केलेले मत - (१)
|
आनंद सगळ्यांनाच हवा असतो... पण आपला आनंद नेमका कशात आहे, हे अनेकांना कळत नसतं. आनंद म्हणजे नेमकं काय हेही उलगडलेलं नसतं. कुठे असतो हा आनंद? कुठे नसतो हा आनंद? आनंदी आनंद गडे, जिकडे तिकडे चोहीकडे! ही फक्त कविकल्पनाच नव्हे, तेच सत्य आहे, किंबहुना शाश्वत सत्य आहे! आनंदाची गंमत अशी आहे, की तुम्ही शोधू लागलात, की तो दडून बसतो, पकडू गेलात, की हातातून निसटतो. आनंदासाठी जितका आटापिटा कराल, तितका तो हुलकावण्या देतो. जितका सहजपणे घ्याल, तितका आनंद सहज प्राप्त होतो. आनंद असतोच. तो अनुभवता मात्र यावा लागतो. आनंदाच्या बाबतीत कळसा काखेत असूनही आपण गावाला वळसा घालीत असतो. आनंद आपण बाहेर शोधत असतो आणि तो मात्र आत असतो. आनंद आपल्या मनातच असतो. आनंदाच्या झऱ्याचा उगम आपल्या अंतरंगातच असतो. हे खरं आहे, की आनंद सर्वत्र असतो; पण अंतरंगात आनंद असेल, तरच तो अनुभवता येतो. आनंदाचं नातं जुळतं, ते फक्त आनंदाशी. आनंदाला आकर्षित करतो, तो फक्त आनंदच. |
(३) स्वमत अभिव्यक्ती - (४)
‘आनंदाच्या झऱ्याचा उगम आपल्या अंतरंगातच असतो’, या विधानाबाबत तुमचे मत स्पष्ट करा.
किंवा
‘आनंदाची तुमची संकल्पना’ तुमच्या शब्दांत लिहा.
Concept: आयुष्य... आनंदाचा उत्सव
खालील उताऱ्याच्या आधारे सूचनेनुसार कृती करा:
(१) (२)
| दृक-श्राव्य दालनातील कारगिल युद्धाच्या फिल्ममधील थरार म्हणजे |
(य) _________ |
| (र) _________ |
(२) (२)
| कारगिल क्षेत्रातील विजयस्तंभा समोर लेखिकेने घेतलेल्या शपथेनुसार करावयाची कार्ये |
(य) _________ |
| (र) _________ |
|
मृत्यू समोर दिसत असतानाही त्याच्या जबड्यात हात घालून मृत्यूलाच आव्हान देणारी बावीस-तेवीस वर्षांची तेजोमय स्फुल्लिंगं होती ती! ज्यांना आशीर्वाद द्यायचे, त्यांच्यासमोर नतमस्तक होऊन सलामी देणं किती कष्टप्रद आहे, ह्याची जाणीव झाली. थरथरत्या हातांनी, डबडबलेल्या डोळ्यांनी त्या स्मारकाला सलाम केला. तेवढ्यात एक तरुण लष्करी अधिकारी तिथे आले. त्यांनी आम्हांला कारगिल-युद्धाची फिल्म बघायला तेथील दृक-श्राव्य दालनात नेलं. तो सगळा थरार म्हणजे दुर्दम्य आशावाद, असामान्य कर्तृत्व, प्रखर राष्ट्रनिष्ठा आणि अदम्य साहस ह्या शब्दांना मूर्तपणे सार्थ करणारं कर्तृत्व होतं. सरतेशेवटी एका शहीद झालेल्या वीराच्या आईनं जे म्हटलं, ते ऐकून एक जबरदस्त चपराक बसल्यासारखं झालं. त्या म्हणाल्या, “जिस देश पर मैंने अपना बच्चा कुर्बान किया है, उस देश से थोडासा प्यार तो करो!” चाबकानं शंभर फटके मारले असते, तर ज्या वेदना झाल्या असत्या; त्यापेक्षाही कितीतरी पटीनं अधिक वेदना मनाला झाल्या. आणि त्या विव्हळ अवस्थेत विजयस्तंभासमोर शपथ घेतली - “शिस्त, निष्ठा, समर्पण आणि त्याग ह्या माझ्या मध्यमवर्गीय शब्दकोशात सपकपणे वापरल्या जाणाऱ्या शब्दांना यथोचित न्याय देईन. केवळ शब्द नाहीत, तर तशी वृत्ती बनलेल्या सैन्यदलातील त्या वीरांचे भाट होऊन त्यांची कवनं गाईन आणि निदान पुढील पाच वर्ष नागरिकांना सोबत घेऊन ह्या भूमीवर येऊन सर्व वीरांना सलामी देईन.” |
(३) स्वमत अभिव्यक्ति - (४)
शहीद वीराच्या आईचे शब्द ऐकून लेखिकेवर झालेला परिणाम तुमच्या शब्दांत लिहा.
किंवा
सैनिकी जीवन व सामान्य नागरिकांचे जीवन यांची तुलना तुमच्या शब्दांत लिहा.
Concept: वीरांना सलामी
रसग्रहण:
सांगती ‘तात्पर्य’ माझें सारख्या खोट्या दिशा:
“चालणारा पांगळा अन् पाहणारा आंधळा !”
माणसांच्या मध्यरात्रीं हिंडणारा सूर्य मी:
माझियासाठी न माझा पेटण्याचा सोहळा !
वरील ओळींचे रसग्रहण करा.
Concept: रंग माझा वेगळा
| कोणत्या काळीं कळेना मी जगाया लागलों अन् कुठे आयुष्य गेलें कापुनी माझा गळा! सांगती ‘तात्पर्य’ माझें सारख्या खोट्या दिशा : ‘‘चालणारा पांगळा अन् पाहणारा आंधळा!’’ माणसांच्या मध्यरात्रीं हिंडणारा सूर्य मी : माझियासाठी न माझा पेटण्याचा सोहळा! |
वरील ओळींतील भावसौंदर्य स्पष्ट करा.
Concept: रंग माझा वेगळा
रंगुनी रंगांत साऱ्या रंग माझा वेगळा!
गुंतुनी गुंत्यात साऱ्या पाय माझा मोकळा!
कोण जाणे कोठुनी ह्या सावल्या आल्या पुढे;
मी असा की लागती ह्या सावल्यांच्याही झळा!
वरील ओळींतील भावसौंदर्य स्पष्ट करा.
Concept: रंग माझा वेगळा
खालील कवितेच्या आधारे सूचनेनुसार कृति करा:
(१) कामक्रोधरूपी विंचू-इंगळी उतरवण्याचे उपाय: (२)
(य) ______
(र) ______
(२) योग्य पर्याय निवडून विधान पूर्ण करा - (२)
(य) सत्त्व उतारा देऊन, म्हणजे ______.
(अ) जीवनसत्त्व देऊन
(आ) सत्त्वगुणांना आश्रय घेऊन
(इ) सात्त्विक आहार देऊन
(ई) सत्त्वाचे महत्त्व सांगून
(र) ‘विंचू चावला वृश्चिक चावला’, या शब्दांच्या द्विरुक्तीमुळे - ______
(अ) भारूड उत्तम गाता येते.
(आ) वेदनांचा असह्यपणा तीव्रतेने जाणवतो.
(इ) भारुडाला अर्थ प्राप्त होतो.
(ई) भारुड अधिक रंजक बनते.
|
विंचू चावला वृश्चिक चावला। पंचप्राण व्याकुळ झाला। मनुष्य इंगळी अति दारुण। ह्या विंचवाला उतारा। सत्त्व उतारा देऊन। |
(३) अभिव्यक्ति: (४)
सद्गुण अंगी बाणविण्यासाठी तुम्ही काय कराल ते लिहा.
Concept: विंचू चावला... (भारूड)
खालील ओळींचा अर्थ लिहा.
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ह्या विंचवाला उतारा। सत्त्व उतारा देऊन। |
Concept: विंचू चावला... (भारूड)
