Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
व्यापार ने हमारे सुख-साधनों को बढ़ाकर हमारे जीवन का स्तर ऊँचा किया हैं। हमारे विशाल भवन, गगनचुंबी अट्टालिकाएँ, स्वच्छ दुग्ध, फैनोज्ज्वल कटे-छटे वस्त्र, विद्युत प्रकाश, रेडियो, तार, टेलिविजन, रेल और मोटारें सब दस व्यापार पर ही आश्रित हैं। व्यापार में दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता अभी बढ़ी हुई है। जब तक यह निर्भरता रहेगी तब तक हम सच्चे अर्थ में स्वतंत्र नहीं हो सकते हैं। हमें अपनी आवश्यकताओं को कम करके जीवन का स्तर नीचे गिराने की आवश्यकता नहीं है, वरन् हमको अपने देश का उत्पादन बढ़ाकर अन्य देशों की भाँति आत्मनिर्भरता प्राप्त कर लेना वांछनीय है। विलास की वस्तुओं के लिए धन बाहर भेजना उसका अपमान है। हम सभ्य तभी कहे जा सकते हैं, जब हम अपनी सभ्यता के प्रसाधनों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर ने रहें। स्वदेशी व्यापार की संपन्न बनाने के लिए उत्पादक और उपभोक्ता दोनों का पारस्परिक सहयोग वांछनीय है। |
- आकृति में लिखिए: (2)

- कृति पूर्ण कीजिए: (2)

- ‘व्यापार में वृद्धि देश की प्रगति’ इस विषय पर अपने विचार 30 से 40 शब्दों में लिखिए। (2)
Advertisements
उत्तर


-
व्यापार किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। व्यापार की वृद्धि से उद्योग, तकनीक, और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। इससे देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है और नागरिकों का जीवन स्तर ऊँचा उठता है। विदेशी व्यापार से देश की प्रतिष्ठा बढ़ती है और संसाधनों का सही उपयोग संभव होता है। अतः व्यापार का विस्तार देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
