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प्रश्न
विश्वेश्वरैया ने बचपन में रामायण, महाभारत, पंचतंत्र आदि की कहानियाँ सुनी थीं। तुमने पाठ्यपुस्तक के अलावा कौन-कौन सी कहानियाँ सुनी हैं? किसी कहानी के बारे में बताओ।
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उत्तर
हमने अपने दादा जी से बहुत-सी धार्मिक कहानियाँ सुनी हैं। गणेश भगवान के जन्म को लेकर कहानी बहुत अद्भुत और अच्छी थी। कहानी इस प्रकार है-
बहुत समय पहले कि बात है। भगवान शंकर शिवलोक में नहीं थे। माता पार्वती शिवलोक में अकेली थीं। वह स्नान करना चाहती थीं, परन्तु स्वयं को अकेला जान थोड़ी चिंतित थीं। शिवलोक में कोई नहीं था। अत: उन्होंने शिव लोक की रक्षा के लिए उबटन से एक बालक बनाया और अपनी शक्ति से उसमें प्राण फूंक दिए। उन्होंने इस बालक का नाम गणेश रखा। उन्होंने गणेश को अपनी शक्तियाँ प्रदान की और कहा कि वह स्नानघर में जा रही हैं। उनकी आज्ञा के बिना कोई भी शिवलोक में प्रवेश न कर पाए। माता की अनुपस्थिति में गणेश शिवलोक की रक्षा करने लगे। इसी समय भगवान शिव राक्षसों का नाश करके शिवलोक आ रहे थे। परन्तु बालक गणेश ने उन्हें शिवलोक में जाने से मना कर दिया। अपने ही घर में प्रवेश करने से रोके जाने के कारण शिव बड़े आश्चर्यचकित हुए। बालक को उन्होंने बहुत प्रकार से समझाया परन्तु वह टस से मस न हुआ। स्थिति ऐसी बन गई की शिव का क्रोध सातवें आसमान पर था। उन्होंने एक झटके पर गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। पुत्र की करुण पुकार सुनकर माता पार्वती तुरंत बाहर आ गईं। अपने पुत्र की दुर्दशा देखकर उनके क्रोध की सीमा नहीं रही। वह नाना-प्रकार से विलाप करने लगीं। धरती-आकाश काँप गया। माता पार्वती को शांत करने के उद्धेश्य से शिव भगवान ने अपने गणों को किसी जीवित प्राणी का सर लाने को कहा। परन्तु उन्होंने ऐसे प्राणी का सर लाना को कहा जो उत्तर दिशा की ओर मुख करके सोया हो।सारी पृथ्वी में उन्हें एक हाथी का बच्चा ही मिला। बस गण उस हाथी को ले आए। भगवान शंकर ने उस हाथी का सर गणेश जी के सर पर जोड़ दिया। वह अब पुन: जीवित हो गए थे। सभी देवी-देवताओं ने नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और वरदान दिए। भगवान शंकर ने आर्शीवाद दिया कि किसी भी मंगल कार्य को आरंभ करने से पूर्व उनकी पुजा करना अनिवार्य होगा।
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