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प्रश्न
'उषा' कविता में प्रकृति में होने वाले परिवर्तन, मानवीय जीवन के चित्र बनकर अभिव्यक्त हुए हैं, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
स्पष्ट कीजिए
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उत्तर
प्रस्तुत कविता सूर्योदय से ठीक पहले के क्षणों में प्रकृति के पल-पल बदलते रूपों का शब्दों के माध्यम से चित्रण है। कवि ने प्रकृति की सुंदरता और उसकी गतिविधियों को शब्दों में बाँधने का प्रयास किया है।
कविता में कवि ने सूर्योदय के साथ एक जीवंत वातावरण की कल्पना की है, जो गाँव की सुबह से जुड़ा हुआ है। इसमें सिल, राख से सजे चौके, स्लेट की कालिमा पर चाक के रंग बिखेरते अदृश्य बच्चों के नन्हे हाथ जैसे नए बिंब, उपमान और प्रतीकों का उल्लेख किया गया है। कवि ने प्रातःकालीन सूर्योदय की विविध छवियों को खूबसूरती से अपनी कविता में प्रस्तुत किया है।
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