Advertisements
Advertisements
प्रश्न
उदाहरणानुसारं लिखत-
| शब्वः | लिङ्गः | विभक्तिः | वचनम् | |
|
यथ- |
आत्मन् | पुल्लिङ्गः | षष्ठौ | एकवचनम् |
| महोदधौ | ______ | ______ | ______ | ______ |
Advertisements
उत्तर
| शब्वः | लिङ्गः | विभक्तिः | वचनम् | |
| महोदधौ | महोदधि | स्त्री. | सप्तमी | एकवचनम् |
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
धारराज्ये को जा प्रजाः पर्यपालयत्?
सिन्धुलः कस्यै रज्यम् अयच्छत्?
वत्सराजः भोजं रथे निवेश्य कुत्र नीतवान्?
महोदधौ सेतुः केन रचितः?
भोजः कस्य पुत्रः आसीत्?
कः भोजस्य जन्मपत्रिकां निर्मितवान्?
मुञ्जः किम् अचिन्तयत्?
वत्सराजः भोजं कुत्र नीतवान्?
वत्सगजः कम् अनमत्?
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
सिन्धुलस्य भोजः पुत्रः अभवत्।
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
एकदा एकः ब्राह्मणः सभायाम् आगच्छत्।
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
मुञ्जः भोजस्य जन्मपत्रिकां अदर्शयत्।
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
वत्सराजः भोजं गृहाभ्यन्तरे ररक्ष।
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
मुञ्जः वह्नौ प्रवेशं निश्चितवान्।
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
मुञ्जः सभामागतं कापालिकं दण्डवत् प्राणमत्।
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
भोजः चिरं प्रजाः पालित्तवान्।
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कूरूत-
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| संवीक्ष्य | ______ | ______ | ______ |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कूरूत-
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| दत्तम् | ______ | ______ | ______ |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कूरूत-
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| विचार्य | ______ | ______ | ______ |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कूरूत-
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| समागत्य | ______ | ______ | ______ |
प्रकृतिप्रत्ययविभागं कूरूत-
| उपसर्गः | धातुः | प्रत्ययः | |
| विधाय | ______ | ______ | ______ |
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
मृ + क्त = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
चिन्त् + तव्यत् = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
हन् + तव्यत् = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
आ + नी + तव्यत् = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
नि + शम् + ल्यप् = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
नम् + क्त्वा = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
आ + कर्ण + ल्यप् = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
मन् + क्त्वा = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
नी + क्तवतु = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
आ + पद् + क्त = ______
प्रकृति -प्रत्ययं नियुज्य शष्वं लिखत-
आ + दिश् + क्त = ______
उचित अर्थेन साह मेलनं कुरुत-
| (क) | निशीथं | गमिष्यति |
| (ख) | प्रणिपत्य | समुद्र |
| (ग) | निशम्य | समुद्र |
| (घ) | पाश्वं | प्रणम्य |
| (ङ) | विषिनि | श्रुत्वा |
| (च) | दशास्यान्तकः | समीपे |
| (छ) | दिवम् | वने |
| (ज) | अधीत्य | रमः |
| (झ) | महो दधौ | स्वर्गम् |
| (ञ) | मस्यति | पठित्वा |
उदाहरणानुसारं लिखत-
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | कचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लड् | प्रथमपुरुष | एकवचन |
| प्रयच्छामि | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत-
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | कचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लड् | प्रथमपुरुष | एकवचन |
| कथयन्ति | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत-
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | कचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लड् | प्रथमपुरुष | एकवचन |
| भवति | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत-
| उपसर्गः | धातुः | लकारः | पुरुषः | कचनम् | |
| यथा- पर्यपालयत् | परि | पाल् | लड् | प्रथमपुरुष | एकवचन |
| असि | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत-
| शब्वः | लिङ्गः | विभक्तिः | वचनम् | |
| यथा आत्मनः | आत्मन् | पुल्लिङ्गः | षष्ठौ | एकवचनम् |
| लोकाः | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत-
| शब्वः | लिङ्गः | विभक्तिः | वचनम् | |
| आत्मनः | आत्मन् | पुल्लिङ्गः | षष्ठौ | एकवचनम् |
| भूमौ | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत-
| शब्वः | लिङ्गः | विभक्तिः | वचनम् | |
|
यथ- |
आत्मन् | पुल्लिङ्गः | षष्ठौ | एकवचनम् |
| वह्नौ | ______ | ______ | ______ | ______ |
विशेषणं विशेष्येण साह योजयत-
| (क) | बालम् | राज्यम् |
| (ख) | दत्तम् | पुत्रम् |
| (ग) | दिवगते | भविष्यवाणीम् |
| (घ) | ज्योतिःशास्त्रपारंगतः | राजनि |
| (ङ) | इमाम् | वत्सराजम् |
| (च) | बद्गदेशाधीश्वरम् | ब्राह्मणः |
| (छ) | सन्तप्तः | ब्राह्मणः |
रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
सिन्धुलः एन्यं मुञ्जाय॒ अयच्छत्।
