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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| स्वयं सहे अन्याय के प्रतिकार की एक ही संभावना देख उसका मन कुछ हलका हो गया था। वह लौटने के लिए उठा। शरीर में शैथिल्य की मात्रा बाकी रहने के कारण साइकिल पर न चढ़ वह पैदल भाटी दरवाजे पहुँचा। मार्ग में शायद ही कोई व्यक्ति दिखाई दिया हो। सड़क किनारे स्तब्ध खड़े बिजली के लैंप निष्काम और निर्विकार भाव से अपना प्रकाश सड़क पर डाल रहे थे। सौर जगत के ये अद्भुत नमूने थे। प्रत्येक पतंगा एक ग्रह की भाँति अपने मार्ग पर चक्कर काट रहा था। कोई छोटा, कोई बड़ा दायरा बना रहा था। कोई दायें को, कोई बायें को, कोई आगे को, कोई विपरीत गति में, निरंतर चक्कर काटते चले जा रहे थे। कोई किसी से टकराता नहीं। वृक्षों के भीगे पत्ते बिजली के प्रकाश में चमचमा रहे थे। |
- आकलन:
कृति पूर्ण कीजिए: [2]
- स्वमत-अभिव्यक्ति: [2]
‘जीव-जंतुओं की रक्षा हमारा कर्तव्य’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।
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उत्तर

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भारत में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष कानून बनाए गए हैं। यह सर्वमान्य तथ्य है कि निःस्वार्थ और मूक वन्यजीवों की रक्षा के लिए देश के हर नागरिक को जागरूक होकर प्रयास करना चाहिए। पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों की सुरक्षा हमारा नैतिक कर्तव्य है। इनमें हम सभी प्रकार के छोटे-बड़े प्राणियों को शामिल करते हैं।
हर जीव का इस संसार में अपना एक विशेष स्थान और महत्व है। वन्यजीव ही वनों की रक्षा करते हैं। जब वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, तभी वन भी सुरक्षित रह पाएँगे। पेड़-पौधे और जानवर मिलकर पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए मनुष्य का यह दायित्व बनता है कि वह इन सभी जीवों का संरक्षण करे, जिससे पृथ्वी पर जीवन और पर्यावरण का संतुलन बना रहे।
