Advertisements
Advertisements
प्रश्न
।। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन। याेगासन है, उत्तम साधन ।।
Advertisements
उत्तर
स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। अच्छे स्वास्थ्य के बिना सब कुछ व्यर्थ है। कहते हैं कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन वास करता है, इसलिए हमें हमेशा अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए अच्छे खान-पान के साथ-साथ शारीरिक व्यायाम भी अनिवार्य है। हमें सुबह जल्दी उठना चाहिए और रात को भी समय पर सो जाना चाहिए। सुबह उठकर खुली हवा में सैर करना लाभदायक होता है। साथ ही हमें योगासन भी अवश्य करना चाहिए। योगासन में शारीरिक क्रियाओं के अलावा श्वासोच्छवास पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस तरह शारीरिक और मानसिक शक्तियों का विकास होता है। अत: स्वस्थ तन-मन के लिए योगासन एक उत्तम साधन है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
शब्दों के आधार पर कहानी लिखो :
ग्रंथालय, स्वप्न, पहेली, काँच
‘यातायात की समस्याएँ एवं उपाय’ विषय पर निबंध लिखो।
अंतरजाल से पद्मभूषण से विभूषित विभूतियों की जानकारी का संकलन करके सुनाओ।
।। सत्यमेव जयते ।।
किसी शहीद और उसके परिवार के बारे में सुनो: मुद्दे - जन्म तिथि, गाँव, शिक्षा, घटना।
यदि साइकिल तुमसे बोलने लगी तो ......
महान विभूतियों की सूची बनाकर उनके कार्यों का उल्लेख करते हुए निबंध लिखो।
यदि सच में हमारे मामा का घर चॉंद पर होता तो...
निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।
खेतों में भुट्टे की फसल देख, हर कोई कहता- कितनी बढ़िया है। दो-चार दिन में कटाई की तैयारी थी लेकिन .......
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
