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सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए- सुरभित, सुंदर, सुखद सुमन तुझपर खिलते हैं, भाँति-भाँति के सरस, सुधोपन फल मिलते हैं।

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

सुरभित, सुंदर, सुखद सुमन तुझपर खिलते हैं,
भाँति-भाँति के सरस, सुधोपन फल मिलते हैं।
औषधियाँ हैं प्राप्त एक-से-एक निराली,
खानें शोभित कहीं धातु वर रत्नोंवाली।

जो आवश्यक होते हमें, मिलते सभी पदार्थ हैं।
हे मातृभूमि वसुधा-धरा, तेरे नाम यथार्थ हैं।।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए:  (2)

(2) अन्तिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)

संक्षेप में उत्तर
सारिणी
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उत्तर

(1) 

(2) प्रस्तुत कविता की पंक्तियाँ कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'मातृभूमि' से ली गयी हैं। कवि कहते है की हमारी भूमि पर अनेक प्रकार की जड़ी बूटियाँ पायी जाती है जिनसे दवाइयाँ बनाई जाती हैं। और मातृभूमि में रत्नों और धातु भी पायी जाती है। जीवन के लिए आवश्यक सभी चीज़े यहाँ आसानी से मिल जाती हैं। कवि कहते हैं कि ऐ मातृभूमि तुम सच में वसुधा और धरा हो, यह नाम तुम्हारे कामों के पूरी तरह अनुकूल हैं।

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मातृभूमि
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