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प्रश्न
सोनार की कार्यविधि तथा उपयोग का वर्णन कीजिए।
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उत्तर
कार्यविधिः सोनार में एक प्रेषित (Transmitter) तथा संसूचक (detector) होता है। इसे किसी नाव या जहाज में चित्रानुसार लगा देते हैं प्रेषित द्वारा पराध्वनि तरंगें उत्पन्न तथा प्रेषित की जाती हैं जो समुद्र तल में स्थित किसी पिंड से टकराकर परावर्तित होती हैं और संसूचक द्वारा ग्रहण कर ली जाती हैं।

संसूचकः पराध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदल देता है
जिनकी उचित रूप से व्याख्या कर ली जाती है। मान लीजिए पराध्वनि संकेतों के प्रेषण तथा अभिग्रहण का समयांतराल =tहै।
समुद्री जल में ध्वनि की चाल = v है।
तब सतह से पिंड की एक तरफ की दूरी (या गहराई) = d
सतह से पिंड तक तथा वापस सतह तक पराध्वनि द्वारा चली गई दूरी = 2d होगी
दूरी = चाल × समय
⇒ 2d = v × t
⇒ d = `("v" xx "t")/2`
उपयोगः उपर्युक्त समीकरण में ′V′ तथा ′t′ के मान
प्रतिस्थापित कर हम मान लेते हैं।
- समुद्र की गहराई ज्ञात करने में
- जल के अंदर स्थित चट्टानों, घाटियों, पनडुब्बियों, हिमशैल (प्लावी बर्फ़), डूबे हुए जहाज आदि की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
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एक पनडुब्बी पर लगी एक सोनार युक्ति, संकेत भेजती है और उनकी प्रतिध्वनि 5 s पश्चात् ग्रहण करती है। यदि पनडुब्बी से वस्तु की दूरी 3625 m हो तो ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
नीचे दिया गया कथन पूर्ण कीजिए व उसका स्पष्टीकरण लिखिए।
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