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प्रश्न
संसाधनों की क्षीणता से संबंधित पर्यावरण के प्रमुख मुद्दे कौन-कौन से हैं?
संक्षेप में उत्तर
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उत्तर
- संसाधनों की क्षीणता का अर्थ है - अस्वीकृत प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करना, और यह पर्यावरण की एक गंभीर समस्या है।
- सम्पूर्ण भारत में विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भूजल के स्तर में लगातार कमी होना एक गंभीर समस्या है।
- नदियों पर बाँध बना दिए गए हैं और इसके बहाव को मोड़ दिया गया है। इस कारण पर्यावरण के जल बेसिन को जो क्षति पहुँची है उसकी भरपाई करना असंभव है।
- शहरों में पाये जाने वाले जलाशय भर दिए गए हैं। और उस पर निर्माण कार्य सम्पन्न होने के कारण प्राकृतिक जल निकासी के साधनों को नष्ट किया जा रहा है।
- भूजल के समान मृदा की ऊपरी परत का निर्माण हजारों सालों के बाद होता है। पर्यावरण के कुप्रबंधन; जैसे - भू कटाव, पानी का जमाव तथा खारेपन इत्यादि के कारण कृषि संसाधन भी नष्ट होते जा रहे हैं।
- मृदा की ऊपरी सतह के विनाश के लिए भवन-निर्माण के लिए ईटों का उत्पादन भी जिम्मेदारी है।
- जंगल, घास के मैदान और आर्द्रभूमि जो कि जैविक विविध आवासों के उदाहरण हैं, ऐसे अन्य मुख्य संसाधन हैं, जो बढ़ती कृषि के कारण समाप्ति के कगार पर खड़े हैं।
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पर्यावरण की प्रमुख समस्याएँ और जोखिम
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