Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
|
शॉ की बात सच है पर यह सच्चाई एकांगी है। सत्य इतना ही नहीं है। पाप के पास चार शस्त्र हैं, जिनसे वह सुधारक के सत्य को जीतता या कम- से-कम असफल करता है। मैंने जीवन का जो थोड़ा-बहुत अध्ययन किया है, उसके अनुसार पाप के ये चार शस्त्र इस प्रकार हैं: उपेक्षा, निंदा, हत्या और श्रद्धा। सुधारक पापों के विरुद्ध विद्रोह का झंडा बुलंद करता है तो पाप और उसका प्रतिनिधि पापी समाज उसकी उपेक्षा करता है, उसकी ओर ध्यान नहीं देता और कभी-कभी कुछ सुन भी लेता है तो सुनकर हँस देता है, जैसे वह किसी पागल की बड़बड़ हो, प्रलाप हो। इन क्षणों में पाप का नारा होता है “अरे, छोड़ो इसे और अपना काम करो।” सुधारक का सत्य उपेक्षा की इस रगड़ से कुछ तेज हो जाता है, उसके स्वर अब पहले से कुछ पैने हो जाते हैं और कुछ ऊँचे भी। अब समाज का पाप विवश हो जाता है कि वह सुधारक की बात सुने। वह सुनता है और उस पर निंदा की बौछारें फेंकने लगता है। सुधारक, सत्य और समाज के पाप के बीच यह गालियों की दीवार खड़ी करने का प्रयत्न है। जीवन अनुभवों का साक्षी है कि सुधारक के जो जितना समीप है, वह उसका उतना ही बड़ा निंदक होता है। यही कारण है कि सुधारकों को प्रायः क्षेत्र बदलने पड़े हैं। |
- आकृति पूर्ण कीजिए: [2]

- उपर्युक्त गद्यांश में ढूँढ़कर शब्द-समूह के लिए एक शब्द लिखिए: [2]
- सुधार करने वाला → -----------------------
- निंदा करने वाला → -----------------------
- पाप करने वाला → -----------------------
- प्रतिनिधित्व करने वाला → -----------------------
- ‘लोगों के सक्रिय सहभाग से ही समाज सुधारक का कार्य सफल हो सकता है’ इस विषय पर अपने विचार 40 से 50 शब्दों में लिखिए। [2]
Advertisements
उत्तर

-
- सुधार करने वाला → सुधारक
- निंदा करने वाला → निंदक
- पाप करने वाला → पापी
- प्रतिनिधित्व करने वाला → प्रतिनिधि
- समाज सुधारक का प्रमुख कार्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त कर एक स्वस्थ और समरस समाज की स्थापना करना होता है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसे समाज के प्रतिनिधियों और ईमानदार कार्यकर्ताओं का सहयोग लेना ज़रूरी होता है। समाज में अनेक प्रकार की बुराइयाँ और विकृतियाँ फैली होती हैं, जिन्हें दूर करने के लिए समाज के लोगों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। कई बार इन बुराइयों के पीछे कुछ स्वार्थी लोगों के निजी हित भी जुड़े होते हैं, जिनका सामना किए बिना सुधार संभव नहीं होता। ऐसे हालात में समाज विरोधी तत्वों पर काबू पाना लोगों की सक्रिय भागीदारी के बिना मुश्किल होता है। अतः समाज सुधारक को अपने कार्य में सफलता पाने के लिए जनसहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
