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प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
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सभ्य होने की प्रक्रिया मानवता की सबसे अच्छी उपलब्धि है। इससे हम उन लक्षणों को चिह्नित कर लेते हैं, जो हमारे आदर्शों को सुचारु रूप से कार्य करने में बाधित करते हैं। कोई भी, जो इस प्रक्रिया से नहीं गुजरता, ‘पिछड़ा’ ही रहता है और सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं बना पाता। विभिन्न गुणों को मिलाकर एक पूर्ण मानव का जन्म होता है। लेकिन हमारी संस्कृति यह चाहती है कि हम एक निश्चित तरीके से जीवन जिएँ, जो कि हमारी स्वयं की प्रकृति का एक छोटा सा स्वरूप होता है। इस प्रकार हमारी प्रकृति और जो कुछ हम हैं, उसके शेष भाग को नकार देते हैं। हम स्वयं को अपने स्वार्थ और परछाई में बाँट लेते हैं, क्योंकि हमारी संस्कृति हमें एक विशिष्ट प्रकार से जीने के लिए ज़ोर देती है। ज्ञान का भंडार पा लेने के बाद वर्षों की सभ्यता से शायद यही हमें विरासत में मिला है। पूरे समाज के जीवन जीने के तरीके को संस्कृति कहते हैं। इसमें सम्मिलित हैं- आचरण के तरीके, पहनावा, भाषा, धर्म, परंपराएँ, व्यवहार के तरीके तथा विचारों से विश्वास बनने की प्रणाली। हमारे अंदर छिपे साधारण मानव को हमसे दूर करके संस्कृति हमें एक जटिल सी शक्ति दे देती है। स्रोत - डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, पुस्तक-विजयी भव से साभार |
(क) संस्कृति शब्द को परिभाषित किया जा सकता है: (1)
- सभ्य और संस्कारी होना
- उपलब्धियों की प्राप्ति
- आदर्शों के साथ जीवन
- सामाजिक प्रतिष्ठित शैली
(ख) निम्नलिखित प्रश्न को पढ़कर नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए: (1)
- सभ्य होना
- भाषा, धर्म एवं परम्पराएँ
- ख़ुद को स्वार्थ और परछाई में बाँट लेना
- व्यवहार की शैली, पहनावा
गद्यांश के अनुसार कौन-सा/ से कथन सही हैं?
- केवल कथन (I) सही है।
- केवल कथन (II) और (IV) सही हैं।
- केवल कथन (I) और (II) सही हैं।
- केवल कथन (I) और (IV) सही हैं।
(ग) पिछड़े हुए समाज का आधारभूत लक्षण माना जा सकता है: (1)
- असभ्य होना
- स्वार्थी होना
- सुद्दढ़ परंपरा
- साधारण मानव
(घ) मानव की सर्वोत्तम उपलब्धि क्या है? (1)
(ङ) हमारी संस्कृति हमसे से क्या अपेक्षा रखती है? (2)
(च) हमें संस्कृति शक्ति कैसे प्रदान करती है? (2)
(छ) हम स्वयं को अपने स्वार्थ और परछाई में क्यों बाँट लेते हैं? (2)
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उत्तर
(क) सामाजिक प्रतिष्ठित शैली
(ख) केवल कथन (II) और (IV) सही हैं।
(ग) असभ्य होना
(घ) सभ्य होने की प्रक्रिया
(ङ) हमारी संस्कृति हमसे अपेक्षा रखती है कि हम एक निश्चित तरीके से जीवन जिएँ, जो कि हमारी स्वयं को प्रकृति का. 'एक छोटा सा स्वरूप होता है।
(च) हमारे अंदर छिपे साधारण मानव को हमसे टूर करके संस्कृति हमें एक जटिल सी शक्ति दे देती है।
(छ) क्याँकि हमारी संस्कृति हमें एक विशिष्ट प्रकार से जीने के लिए ज़ोर देती है। ज्ञान का भंडार पा लेने के बाद वर्षों की सभ्यता से शायद यही हमें विरासत में मिला है।
