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प्रश्न
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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सावन आइ गये मनभावन, बदरा घिर-घिर आवै ना! |
- कृति पूर्ण कीजिए: (२)

- निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश में आए समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (२)
- हवा = -----------------
- पृथ्वी = -----------------
- नदी = -----------------
- बादल = -----------------
- ‘सावन बड़ा मनभावन’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
आकलन
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उत्तर

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- हवा = पवन
- पृथ्वी = धरती
- नदी = सरिता
- बादल = बदरा
- सावन मास का नाम सुनते ही मन में उत्साह और उमंग की लहर दौड़ जाती है। भारतीय संस्कृति में सावन का विशेष स्थान है। इस महीने की काली घटाएँ, उमड़ते बादल, रिमझिम फुहारें और भीनी-भीनी ठंडक सभी को आनंदित कर देती हैं। गर्मी की तपन के बाद सावन की ठंडी बूँदें शरीर और मन दोनों को तरोताज़ा कर देती हैं और वातावरण में ताजगी घोल देती हैं। सूखी और मुरझाई धरती सावन की वर्षा में भीगकर हरियाली की चूनर ओढ़ लेती है और सुंदरता से सज जाती है। यह महीना न सिर्फ प्रकृति को जीवंत करता है, बल्कि मनुष्य के हृदय में भी खुशियाँ और उमंग भर देता है। जैसे-जैसे प्रकृति मुस्कुराती है, वैसे-वैसे मन भी नाचने को मजबूर हो जाता है।
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