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प्रश्न
सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने के लिए आप क्या-क्या सुझाव देना चाहेंगे?
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उत्तर
सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने के लिए मैं निम्नलिखित सुझाव देना चाहूँगा-
- हिंदू-मुसलमानों को परस्पर मिल-जुलकर रहना चाहिए।
- उन्हें एक-दूसरे के धर्म का आदर करना चाहिए तथा धर्म के प्रति कट्टरता को त्याग करना चाहिए।
- एक-दूसरे के त्योहारों को मिल-जुलकर मनाना चाहिए, जिससे आपसी दूरी कम हो जाए।
- अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए नेताओं को किसी धर्म के विरुद्ध भड़काऊ भाषण नहीं देना चाहिए।
- एक-दूसरे के धर्म, भाषा, रहन-सहन, आचार-विचार तथा सामाजिक मान्यताओं को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
- किसी बहकावे में आकर मरने-मिटने को तैयार नहीं हो जाना चाहिए।
- अपने विचारों की संकीर्णता में दोनों धर्मों के लोगों को बदलाव लाना चाहिए।
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निम्नांकित शब्द-समूहों को पढ़ो और समझो
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- कंघा, पतंग, चंचल, ठंडा, संबंध।
- अक्षुण्ण, सम्मिलित, दुअन्नी, चवन्नी, अन्न।
- संशय, संसद्, संरचना, संवाद, संहार।
- अँधेरा, बाँट, मुँह, ईंट, महिलाएँ, में, मैं।
ध्यान दो कि ङ, ज्, ण, न् और म् ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं। इनके लिखने की विधियाँ तुमने ऊपर देखीं-इसी रूप में या अनुस्वार के रूप में। इन्हें दोनों में से किसी भी तरीके से लिखा जा सकता है और दोनों ही शुद्ध हैं। हाँ, एक पंचमाक्षर जब दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा; जैसे-अम्मा, अन्न आदि। इसी प्रकार इनके बाद यदि अंतस्थ य, र, ल, व और ऊष्म श, ष, स, ह आदि हों तो अनुस्वार का प्रयोग होगा, परंतु उसका उच्चारण पंचम वर्गों में से किसी भी एक वर्ष की भाँति हो सकता है; जैसे-संशय, संरचना में ‘न्’, संवाद में ‘म्’ और संहार में ‘ङ’।
( ं) यह चिह्न है अनुस्वार का और ( ँ) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमशः बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार को प्रयोग व्यंजन के साथ होता है अनुनासिक का स्वर के साथ।
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(क) |
प्रमाण |
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(ख) |
प्रणाम |
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(ग) |
धारणा |
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(घ) |
धारण |
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(ङ) |
पूर्ववर्ती |
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(च) |
परवर्ती |
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(छ) |
परिवर्तन |
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(ज) |
प्रवर्तन |
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पाठ के आधार पर मिलान कीजिए −
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नीला |
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पिता |
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भारतीय वाद्ययंत्र |
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उपकरण |
वैज्ञानिक रहस्य |
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