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प्रश्न
'ऋणपत्र' पत्र 'अंश' से भिन्न क्यों होते हैं, दो अंतर बताइए?
ऋणपत्र एवं अंश के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
| अंतर का आधार | अंश | ऋणपत्र |
| स्वामित्व | अंशधारी कंपनी का स्वामी होता है। | जबकि ऋणपत्रधारी मात्र एक लेनदार होता है। |
| प्रतिफल | अंश का प्रतिफल लाभांश के रूप में प्राप्त होता है। | ऋणपत्र का प्रतिफल ब्याज के रूप में प्राप्त होता है। |
| शोधन | समता अंशों का शोधन कंपनी के जीवन काल में नहीं किया जाता है। | ऋणपत्र एक निश्चित अवधि के लिए जारी किये जाते है। तत्पश्यात इसका शोधन कर दिया जाता है। |
| मतदान का अधिकार | अंशधारकों को मतदान का अधिकार होता है। | ऋणपत्र धारकों को मतदान का अधिकार नहीं होता है। |
| सुरक्षा | अंश किसी भी प्रकार सुरक्षित नहीं होते हैं । | ऋणपत्र सुरक्षित होते हैं क्योंकि सामान्यतः इन्हें कंपनी की सम्पत्तियों पर चल प्रभार होता है । |
| परिवर्तन | अंश को ऋणपत्र में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। | ऋणपत्र के नियमों के तहत अंश में परिवर्तित किया जा सकता है। |
| हरण एवं पुनः निर्गमन | अंशों का हरण एवं पुनः निर्गमन किया जा सकता है। | ऋणपत्रों का हरण नहीं होता है अतः पुनः निर्गमन भी नहीं होता। |
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एक ऋणपत्र से क्या तात्पर्य है?
ए. लिमिटेड ने 8% के बट्टे पर 50 रु. प्रत्येक के 90,00,000, 9% ऋणपत्र पर जारी किए जो 9 वर्ष बाद सममूल्य पर मोचनीय हैं। ए लिमिटेड की खाता पुस्तकों हेतु आवश्यक प्रविष्टियाँ करें।
बी लिमिटेड ने 1 अप्रैल 2014 को 5% बट्टे पर 100 रु. प्रत्येक के 1,000, 12% ऋणपत्र निर्गमित किए जो परिपक्वता अवधि पर 10% प्रीमियम के साथ मोचनीय हैं। ऋणपत्र के निर्गम से संबंधित रोजनामचा प्रविष्टियाँ तैयार करें तथा 31 मार्च 2015 की समाप्त अवधि से ऋणपत्र पर ब्याज यह मानकर परिकलित करें कि अर्धवार्षिक (30 सितंबर व 31 मार्च को) ब्याज देय है तथा स्रोत पर 10% टी डी एस कटौती होती है। इन मामलों हेतु क्या रोजनामचा प्रविष्टियाँ की जाएँगी जहाँ कंपनी ऋणपत्र अवधि पूरी होने पर सूचना भेज कर ऋणपत्र मोचित करती है-
