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'प्रकृति सजीव नारी बन गई'- इस कथन के संदर्भ में लेखक की प्रकृति, नारी और सौंदर्य संबंधी मान्यताएँ सपष्ट कीजिए। - Hindi (Elective)

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प्रश्न

'प्रकृति सजीव नारी बन गई'- इस कथन के संदर्भ में लेखक की प्रकृति, नारी और सौंदर्य संबंधी मान्यताएँ सपष्ट कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

लेखक की प्रकृति, नारी और सौंदर्य संबंधी कुछ मान्यताएँ हैं। ये मान्यताएँ आपस में गुथी हुई हैं। जब लेखक दस बरस का था, तो उसने एक स्त्री को देखा था। वह उससे दस वर्ष बड़ी थी। उसका सौंदर्य अद्भुत था। संतोषी भाई के घर के बाहर आँगन में एक जूही की लता लगी थी। उससे आने वाली सुंगध लेखक के प्राणों तक को महका गई थी। लेखक चाँदनी रात में लता पर खिले फूलों में चाँदनी को देखता है। उसे प्रतीत होता है मानो चाँदनी जूही के फूलों के रूप में लता में उग आई हो। यहाँ लेखक प्रकृति को जूही, खुशबू, लता तथा स्त्री के रूप में देखता है। उसके लिए ये अलग-अलग नहीं हैं। ये सब आपस में जुड़े हुए ही हैं। अतः वह औरत को चाँदनी के रूप में जूही की लता सी प्रतीत होती है। वह प्रकृति में उस औरत को और औरत को प्रकृति के रूप में देखता है।
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बिस्कोहर की माटी
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निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए -

  1. भरभंडा : फूल
  2. डोंडहा : साँप
  3. कोइयाँ : जलपुष्प
  4. धामिन : अनाज

इन युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं -


‘कोई भी तालाब अकेला नहीं है।’ यह कथन दर्शाता है -


कथन (A) - नारी प्रकृति का सजीव रूप है।

कारण (R) - नारी शरीर से उन्हें बिस्कोहर की फसलों, वनस्पतियों की उत्कट गंध आती है।


निम्नलिखित शब्द-युग्मों को सुमेलित कीजिए -

  भाग-1   भाग-2
(1) भरभंडा (क) खेतों में पानी देने के लिए छोटी-छोटी
नालियाँ बनाई जाती है
(2) कोइयां (ख) एक प्रकार का फल
(3) बरहा (ग)  कमल का फूल
(4) पुरइ (घ) कोका-बेली

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