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“प्रभा के प्रति मेरे मन में प्यार, उसकी मजबूरियों और तकलीफों के प्रति दया है, या सिर्फ अपने किए पर पछतावा है?” इस कथन के पीछे समर की क्या मानसिकता है? - Hindi (Indian Languages)

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प्रश्न

“प्रभा के प्रति मेरे मन में प्यार, उसकी मजबूरियों और तकलीफों के प्रति दया है, या सिर्फ अपने किए पर पछतावा है?” इस कथन के पीछे समर की क्या मानसिकता है? अपनी पत्नी प्रभा के साथ उसके रिश्तों में आए बदलाव का वर्णन कीजिए।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

समर के मन में एक अजीब-सी उलझन बनी हुई है, जिसे वह स्वयं भी ठीक से समझ नहीं पा रहा है। वह यह तय नहीं कर पा रहा कि प्रभा के प्रति जो भाव उसके मन में हैं, वे सच्चा दांपत्य प्रेम हैं या फिर पहले किए गए अनुचित व्यवहार का अपराधबोध और पछतावा।

दूसरी ओर, प्रभा की स्थिति भी उसे विचलित करती है। विवाह से पहले वह जैसे एक शरणार्थी की तरह जीवन जी रही थी, लेकिन विवाह के बाद वही प्रभा मानो एक कटघरे में बंद हो गई हो। पति के होते हुए भी वह विवशता में सब कुछ सहन कर रही है और निरंतर कष्ट झेल रही है। समर के मन में यह प्रश्न उठता है कि उसके प्रति जो भाव उत्पन्न हो रहे हैं, क्या वे केवल दया की भावना भर तो नहीं हैं।

तीसरी स्थिति यह है कि विवाह के बाद समर ने प्रभा के साथ पति-पत्नी जैसा उचित व्यवहार नहीं किया। उसने उसे लगातार उपेक्षित दृष्टि से देखा, जिससे प्रभा स्वयं को अस्वाभाविक और अकेला महसूस करने लगी। इस प्रकार का व्यवहार करते हुए समर ने लगभग एक वर्ष बिता दिया। जब घर के अन्य सदस्यों ने उसके व्यवहार को अनुचित बताकर समझाया, तब उसे अपनी भूल का एहसास हुआ और वह स्वयं को दोषी मानने लगा। उसे यह भी लगा कि भाभी द्वारा सब्ज़ी में दोबारा नमक डालना या प्रभा के आने-जाने वाले पत्र पढ़ना भी गलत था। समर को यह समझ में आया कि प्रभा पूरे मन और तन से परिवार के साथ कितना अच्छा व्यवहार करती थी, लेकिन वे उसके मन को समझ ही नहीं पाए। पश्चाताप करते हुए वह स्वीकार करता है कि उसके द्वारा किया गया व्यवहार क्षमायोग्य नहीं था।

धीरे-धीरे समर का लगाव प्रभा के प्रति बढ़ने लगा। दोनों एक-दूसरे को समझने लगे और आपस में खुलकर बातचीत करने लगे। वे अपनी मानसिक और शारीरिक परेशानियों का समाधान मिलकर करने लगे। उनके बढ़ते प्रेम का कुछ पारिवारिक सदस्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, विशेषकर भाभी पर। कार्यवाहक को लेकर भी भाभी दोनों से नाराज़ रहने लगीं। इसके बावजूद घर की आर्थिक स्थिति को सँभालने के लिए प्रभा रात तीन बजे उठकर पति के लिए भोजन तैयार करती थी। दिनभर घर के कामों में व्यस्त रहने के बाद वह देर से लौटने वाले समर के साथ भोजन करना चाहती थी। इसी सहयोग और समझ के कारण समर अपने फ्रीलांसिंग कार्य को ठीक प्रकार से कर पाता था।

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