Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
|
पिता हमेशा रुक्ष नहीं होता, सदैव कठोर व्यवहार से घर को संचालित नहीं करता क्योंकि वह भीतर से सौम्य प्रकृति का होता है। पिता का प्रेम दिखाई नहीं देता, उसे महसूस किया जा सकता है। बाहर से कठोर दिखाई देने वाला पिता भीतरी स्तर पर अत्यंत भावुक होता है। जिस घर में पिता बच्चों के साथ बातचीत करता है, हँसता-बोलता है, उनके सभी क्रियाकलापों में सहयोग करता है, उसी घर में बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास उचित रूप से हो पाता है। अच्छी और सुसंस्कृत संतान हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है। बच्चों के पालन-पोषण में दोनों समान भूमिका निभाते हैं। आज का युग इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, जहाँ माता-पिता दोनों कामकाजी हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी में घर के साथ दफ्तर भी सँंभालना होता है। ऐसे में केवल माँ के भरोसे घर और बच्चों को छोड़ना सही नहीं है। दोनों के सहयोग से ही घर को सँभाल पाना संभव होता है। पिता का दायित्व आज दफ्तर की सीमा से निकलकर घर तक आ गया है। बच्चों को सुबह उठाकर स्कूल भेजने से लेकर होमवर्क करवाने तक सभी कार्यों में उसकी समान भागीदारी आज अपेक्षित है। आज नई पीढ़ी के युवा घर में इन जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते देखे जा सकते हैं। वर्तमान समय में पढ़े-लिखे कामकाजी-एकल परिवार में व्यक्ति का जीवन दबाव में ही दिखता है, चाहे वह पढ़ाई का हो, कैरियर का हो अथवा कार्यक्षेत्र में हो। परिवार का खुशनुमा और परस्पर सौहार्दपूर्ण वातावरण उस दबाव से बाहर निकलने में सहायक बनता है। |
(I) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए। दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए और उत्तर लिखिए। (1)
कथन: पिता सदैव कठोर व्यवहार से घर को संचालित नहीं करता।
कारण: बच्चों की गतिविधियों में पिता की सौम्यतापूर्ण भागीदारी और सहयोग रहता है।
विकल्प:
- कथन सही है, लेकिन कारण गलत है।
- कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
- कथन सही है और कारण उसकी सही व्याख्या है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं, लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
(II) अच्छी और सुसंस्कृत संतान के लिए अपेक्षित है- (1)
- बच्चों के पालन-पोषण में केवल माता की सहभागिता।
- बच्चों के पालन-पोषण में केवल पिता की सहभागिता।
- बच्चों के पालन-पोषण में माता-पिता दोनों की सहभागिता।
- बच्चों के पालन-पोषण में समाज की सहभागिता।
(III) आज की युवा पीढ़ी में कौन-सा सकारात्मक परिवर्तन आया है? (1)
- युवा माता-पिता दोनों का कामकाजी होना।
- बच्चों की परवरिश में माता को पिता का पूर्ण सहयोग मिलना।
- एकल परिवारों का चलन दिन-प्रतिदिन बढ़ना।
- एकल परिवारों में बच्चों का जल्दी परिपक्व होना।
(IV) माता-पिता पर अपनी संतान को लेकर कौन-कौन से दबाव हैं। इन दबावों से आप अपने माता-पिता को मुक्ति कैसे दिलवा सकते हैं? (2)
(V) पिता की कौन-सी दो विरोधी बातें परिवार को सही दिशा में ले जाती हैं? (2)
Advertisements
उत्तर
(I) कथन सही है और कारण उसकी सही व्याख्या है।
(II) बच्चों के पालन-पोषण में माता-पिता दोनों की सहभागिता।
(III) बच्चों की परवरिश में माता को पिता का पूर्ण सहयोग मिलना।
(IV) वर्तमान दौर में शिक्षित और कार्यरत एकल परिवारों में व्यक्ति का जीवन अक्सर तनावपूर्ण रहता है, चाहे वह पढ़ाई, करियर या कार्यक्षेत्र से संबंधित हो। ऐसे में परिवार का सुखद, प्रेमपूर्ण और आपसी सहयोग से भरा वातावरण उसे इस दबाव से उबरने में मदद करता है।
(V) पिता का दफ्तर की जिम्मेदारियों से बाहर निकलकर घर के कार्यों में भी सक्रिय रूप से शामिल होना तथा बच्चों को सुबह जगाने से लेकर उन्हें स्कूल भेजने और होमवर्क कराने तक हर काम में समान भागीदारी निभाना ये दोनों विपरीत भूमिकाएँ संतान को सही मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।
