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फीचर लेखन केसोपानों को स्पष्ट कीजिए । - Hindi

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प्रश्न

फीचर लेखन के सोपानों को स्पष्ट कीजिए ।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

फीचर लेखन की प्रक्रिया के निम्नलिखित सोपान हैं

(१) प्रस्तावना : प्रस्तावना में फीचर के विषय का संक्षिप्त परिचय दिया जाता है। यह परिचय आकर्षक और विषयानुकूल होना चाहिए। परिचय पढ़कर पाठकों के मन में फीचर पढ़ने की जिज्ञासा जाग्रत होती है और पाठक अंत तक फीचर से जुड़ा रहता है।

(२) विवरण अथवा मुख्य कलेवर : फीचर में विवरण का महत्त्वपूर्ण स्थान है। फीचर में लेखक स्वयं के अनुभव, लोगों से प्राप्त जानकारी और विषय की क्रमबद्धता, रोचकता के साथ-साथ संतुलित तथा आकर्षक शब्दों में पिरोकर उसे पाठकों के सम्मुख
रखता है जिससे फीचर पढ़ने वाले को ज्ञान और अनुभव से संपन्न कर दे।

(३) उपसंहार : यह अनुच्छेद संपूर्ण फीचर का सार अथवा निचोड़ होता है। इसमें फीचर लेखक फीचर का निष्कर्ष भी प्रस्तुत कर सकता है अथवा कुछ अनुत्तरित प्रश्न पाठकों के ऊपर भी छोड़ सकता है। उपसंहार ऐसा होना चाहिए जिससे पाठक को विषय से संबंधित ज्ञान भी मिल जाए और उसकी जिज्ञासा भी बनी रहे।

(४) शीर्षक : विषय का ओचित्यपूर्ण शीर्षक फीचर की आत्मा है। शीर्षक संक्षिप्तं रोचक और जिज्ञासा वर्धक होना चाहिए। नवीनता, आकर्षकता और ज्ञान बुद्धि उत्तम शीर्षक के गुण हैं।

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फीचर लेखन
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अध्याय 15: फीचर लेखन - पाठ पर आधारित [पृष्ठ ९०]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Yuvakbharati [English] Standard 12 Maharashtra State Board
अध्याय 15 फीचर लेखन
पाठ पर आधारित | Q 2 | पृष्ठ ९०

संबंधित प्रश्न

फीचर लेखन की विशेषताएँ लिखिए ।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

फीचर लेखन करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डालिए।


भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर फीचर लेखन कीजिए।


लता मंगेशकर पर फीचर लेखन कीजिए ।


विषय का ______ शीर्षक फीचर की आत्मा है।


फीचर लेखन के मुख्य तीन अंगों में से एक है:


निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

रोचक प्रसंगों के साथ स्नेहा विद्यार्थियों को फीचर लेखन की विशेषताएँ बताने लगी, “अच्छा फीचर नवीनतम जानकारी से परिपूर्ण होता है। किसी घटना की सत्यता अथवा तथ्यंता फीचर का मुख्य तत्व है। फीचर लेखन में राष्ट्रीय स्तर के तथा अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों का समावेश होना चाहिए क्योंकि समाचार पत्र दूर-दूर तक जाते हैं। इतना ही नहीं ; फीचर का विषय समसामयिक होना चाहिए। फीचर लेखन में भावप्रधानता होनी चाहिए क्योंकि नीरस फीचर कोई नहीं पढ़ना चाहता। फीचर के विषय से संबंधित तथ्यों का आधार दिया जाना चाहिए। '' स्नेहा आगे बोलती जा रही थी,' विश्वसनीयता के लिए फीचर में विषय की तार्किकता को देना आवश्यक होता है। तार्किकता के बिना फीचर अविश्वसनीय बन जाता है। फीचर में विषय की नवीनता का होना आवश्यक है क्योंकि उसके अभाव में 'फीचर अपठनीय बन जाता है। फीचर में किसी व्यक्ति अथवा घटना विशेष का उदाहरण दिया गया हो तो उसकी संक्षिप्त जानकारी भी देनी चाहिए।''

पाठक की मानसिक योग्यता और शैक्षिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर फीचर लेखन किया जाना चाहिए। उसे प्रभावी बनाने हेतु प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों, उदाहरणों, लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग फीचर में चार चाँद लगा देता है।

1. प्रश्न के उत्तर लिखिए।   (2)

  1. फीचर का मुख्य तत्त्व लिखिए।
  2. फीचर लेखन में भाव प्रधानता क्यों होनी चाहिए?
  3. किस के बिना फीचर अविश्वसनीय बन जाता है?
  4. फीचर लेखन में किससे चार चाँद लगते है?

2. निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए।  (2)

  1. नीरस × ______
  2. निष्पक्ष × ______
  3. विख्यात × ______
  4. क्लीष्ट × ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए।  (2)

लता मगेंशकर का फीचर लेखन कीजिए।


फीचर लेखक को ______ रूप से अपना मत व्यक्त करना चाहिए।


विषय का औचित्यपूर्ण ______ फीचर की आत्मा हैं।


______ को पत्रकारिता के क्षेत्र में फीचर लेखन के लिए दिए जाने वाले ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर लेखन’ के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।


फीचर लेखन में ______  होनी चाहिए।


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