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प्रश्न
निवेशक के लिए डिपॉजिटरी प्रणाली के कोई भी चार लाभ स्पष्ट कीजिए।
स्पष्ट कीजिए
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उत्तर
- जोखिमों का खात्मा: भौतिक प्रमाणपत्रों (physical certificates) से जुड़े सभी जोखिम जैसे देरी, खो जाना, चोरी होना, फटना या गलत डिलीवरी आदि पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।
- सुरक्षा: यह प्रतिभूतियों (securities) को रखने का सबसे सुरक्षित तरीका है। पूरी प्रणाली डिपॉजिटरी अधिनियम के तहत काम करती है और SEBI द्वारा इसकी निगरानी की जाती है। निवेशक अपने खाते को ‘फ्रीज/लॉक’ भी कर सकता है।
- शेयरों का आसान हस्तांतरण:
- ट्रांसफर फॉर्म भरने और दस्तावेज जमा करने की मेहनत खत्म हो जाती है।
- भौतिक शेयरों के ट्रांसफर पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी नहीं देनी पड़ती।
- ट्रांसफर में लगने वाला समय कम हो जाता है और पैसा या शेयर अनावश्यक रूप से फंसे नहीं रहते।
- अपडेट और सूचना: निवेशक को उसके होल्डिंग्स और लेनदेन की स्थिति की जानकारी समय-समय पर डिपॉजिटरी या DP (डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट) द्वारा दी जाती है।
- ऋण के विरुद्ध सुरक्षा: बैंक और वित्तीय संस्थान ऋण (loan) के बदले गिरवी रखने के लिए डीमैटरियलाइज्ड प्रतिभूतियों को अधिक प्राथमिकता देते हैं।
- ‘लॉट’ की कोई अवधारणा नहीं: विषम (odd) और सम (even) लॉट की पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई है। अब मार्केट लॉट केवल एक शेयर का हो सकता है।
- नामांकन सुविधा: व्यक्तिगत निवेशक नामांकन (nomination) की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इससे निवेशक की मृत्यु होने पर कानूनी प्रक्रिया बहुत सरल हो जाती है।
- स्वचालित क्रेडिट (Automatic Credit): कंपनी द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय (जैसे डिविडेंड, बोनस शेयर, या राइट्स शेयर) का लाभ निवेशक के खाते में अपने आप जमा हो जाता है। इसे ‘कॉर्पोरेट एक्शन’ कहा जाता है।
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