सागर तट की शाम का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है। गर्मी के मौसम में समुद्र के किनारे बसे नगरों में संध्या समय सागर तट पर भीड़ उमड़ पड़ती है। वहाँ जाकर मन प्रसन्नता से भर उठता है। समुद्र के किनारे कुछ समय बिताकर ही उसकी असली सुंदरता और आकर्षण का अनुभव होता है।
मैं उस समय समुद्र तट पहुँचा जब सूर्य क्षितिज की ओर धीरे-धीरे ढल रहा था। समुद्र पर धीरे-धीरे अंधकार छाने लगा था। वह दृश्य इतना सुंदर था कि उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता – बस अनुभव ही किया जा सकता है।
सूरज की लालिमा धीरे-धीरे समुद्र में विलीन हो गई और चारों ओर गहरा अंधकार छा गया। सागर तट पर हर तरफ हलचल थी – पानी-पूरी, भेल-पूरी और आइसक्रीम की दुकानों पर लोगों की भीड़ जमा थी। दिनभर की थकान के बाद लोग ताजगी पाने वहाँ आए थे।
बच्चे खेलों में मग्न थे, कुछ घोड़े की सवारी कर रहे थे। एक मदारी अपने बंदरों के करतब दिखा रहा था, वहीं एक कलाकार ने रेत से साईं बाबा की सुंदर प्रतिमा बनाई थी जिसे देखकर मन आनंद से भर गया।
दूर समुद्र में नौकाएँ लहरों पर तैरती बहुत सुंदर लग रही थीं। आकाश में पक्षियों का झुंड अपने घोंसलों की ओर उड़ता जा रहा था। उनका कलरव वातावरण को मधुर बना रहा था।
धीरे-धीरे सभी लोग लौटने लगे, और मैं भी अपने घर की ओर चल पड़ा। सागर तट की वह संध्या मेरे जीवन की एक अविस्मरणीय स्मृति बन गई है, मानो उस पल मुझे कोई अनमोल खजाना मिल गया हो।
