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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर दिए गए संकेत-बिन्दुओं के आधार पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबन्ध लिखिए:
मातृभाषा के प्रति अभिरुचि
- मातृभाषा से तात्पर्य
- घटती रुचि के कारण
- रुचि कैसे बढ़े
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उत्तर
मातृभाषा के प्रति अभिरुचि
मातृभाषा व्यक्तित्व बनाने का एक प्रभावी साधन है। भाषा हमें एकजुट करती है, तो मातृभाषा हमारी पहचान है। जन्म के बाद एक व्यक्ति की पहली भाषा उसकी मातृभाषा होती है। जिस भाषा में माँ सोचती और बोलती है, वही बच्चे की मातृभाषा होगी। इसी से हमारी सभी आदतों का जन्म होता है। भाषा हमें अपनी संस्कृति से जोड़ती है और उसकी धरोहर को बचाती है।
आज मातृभाषा पर हमारी रुचि कम होती जा रही है। बच्चों को मातृभाषा में गिनती करना भूल गया है। एक से अधिक भाषाओं बोलना अच्छा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा या सांस्कृतिक धरोहर से दूर हो जाएँ। हम अपने राज्य या प्रांत की भाषा बोलना चाहिए। मातृभाषा का ज्ञान न होते हुए भी आज बच्चे अंग्रेजी बोलने से स्वयं को श्रेष्ठ समझते हैं, जो सही नहीं है। यही कारण है कि आज के बच्चों में गाँव और शहर के बीच की दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं। हम अपनी भाषा में निर्मित सुंदर लोकगीत, दोहे, छंद और लोकनृत्य भूल जा रहे हैं।
हमारी मातृभाषा का सम्मान होना चाहिए। उसे बचाना चाहिए। महात्मा गाँधी ने कहा कि अगर मातृभाषा शिक्षा का माध्यम नहीं होगी, तो बच्चे रटने को मजबूर हो जाएंगे, जो उनकी सृजनात्मकता को समाप्त कर देगा। 17 नवंबर 1999 को यूनेस्को ने मातृभाषा के महत्व को समझते हुए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया। इसलिए 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में विश्व भर में मनाया जाता है। हम सभी का कर्तव्य है कि अपनी मातृभाषा को समझें। उसे बोलना अपना गौरव समझने की कोशिश करें और उसे दुनिया में एक सम्मानपूर्ण स्थान देने की कोशिश करें।
