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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए:
अब अबला नहीं, सबला है नारी
संकेत बिन्दु:
- बदलता समय
- किसी से कम नहीं
- नारी के बढ़ते कदम
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उत्तर
अब अबला नहीं, सबला है नारी
हमारे देश में प्राचीनकाल से ही नारी को सम्मान दिया जाता रहा है। हमारे यहाँ नारी-नर को लक्ष्मी-नारायण का प्रतिरूप माना गया है। प्राचीन काल में नारी को जो सम्मान प्राप्त था, वह मध्यकाल में घट गया था। परन्तु वर्तमान में नारी वह सम्मान पुनः प्राप्त करने में आगे आ रही है।
नारी का प्रचीन स्वरूप - वैदिक काल में भारतीय नारी का स्वरूप बहुत ही सम्मानीय था। उस समय नर-नारी को समान अधिकार थे। उच्च शिक्षा प्राप्त करने का उन्हे अधिकार था। गार्गी, मैत्रेयी आदि विदुषी नारियो के उदाहरण इस बात के गवाह है।
मध्यकाल में भारतीय नारी-मध्यकाल में भारतीय नारी की स्थिति में गिरावट आयी। इस काल में उसे स्वतंत्रता का अधिकार नहीं दिया गया। उसे पर्दे में अथवा घर की चाहर दीवारी में ही रहने को विवश किया गया। इस तरह उसका जीवन अत्यन्त दयनीय रहा। भारत की आजादी के बाद महिला सशक्तिकरण के लिए कई प्रयास किए गए। सती प्रथा, बाल विवाह, बहु विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म किया गया और महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए गए।
वर्तमान युग की नारी-आजादी प्राप्त करने के बाद भारतीय नारी की शिक्षा एवं रहन-सहन पर ध्यान दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ की नारी भी पुरुषो के समान डॉक्टर, वकील, जज, मन्त्री, अधिकारी, समाज सेविका एवं उधमी आदि सभी पदों पर कुशलता से कार्य कर रही है। वर्तमान में तो भारतीय नारियो ने विज्ञानं, राजनीति और अन्य क्षेत्रो में भी अपना वर्चस्व स्थापित किया है। भारतीय सेना में भी नारियो की नियुक्ति होने लगी है।
आज आर्थिक बाजारवाद के इस युग में नारी सौन्दर्य प्रदर्शन और विज्ञापन के क्षेत्र में बहुत आगे है फिर भी उसे आपने नारी अस्तित्व की गरिमा को समझना चाहिए और उसे अपनी क्षमताओं के आधार पर यह विचार करना चाहिए की वह अबला नहीं सबला है।
