अस्पताल में एक घंटा
कुछ दिन पहले मुझे अपने एक रिश्तेदार से मिलने अस्पताल जाना पड़ा। वहाँ बिताया गया एक घंटा मेरे लिए बहुत ही भावुक और विचारपूर्ण अनुभव रहा। अस्पताल में प्रवेश करते ही दवाइयों की गंध और चारों ओर फैली शांति ने मन को गंभीर बना दिया। प्रतीक्षालय में कई लोग अपने परिजनों की चिंता में बैठे थे। उनके चेहरों पर आशा और चिंता दोनों के भाव दिखाई दे रहे थे।
वार्ड में डॉक्टर और नर्सें लगातार मरीजों की देखभाल में व्यस्त थीं। कोई इंजेक्शन दे रहा था, तो कोई दवाइयाँ बाँट रहा था। कुछ मरीज दर्द से कराह रहे थे, तो कुछ धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे थे। मशीनों की बीप-बीप की आवाज और डॉक्टरों के निर्देश वातावरण को और भी संवेदनशील बना रहे थे।
मैंने देखा कि अस्पताल केवल इलाज का स्थान नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का केंद्र भी है। डॉक्टर और नर्सें दिन-रात मेहनत करके मरीजों को स्वस्थ बनाने का प्रयास करते हैं। वहाँ का वातावरण हमें यह सिखाता है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपत्ति है।
उस एक घंटे ने मुझे जीवन का सच्चा मूल्य समझाया। हम अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब बीमारी सामने आती है, तब उसकी अहमियत समझ में आती है। इसलिए हमें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वच्छ जीवनशैली अपनानी चाहिए। अस्पताल में बिताया वह एक घंटा मेरे लिए एक सीख बन गया।
