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प्रश्न
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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चाहे सभी सुमन बिक जाएँ चाहे ये उपवन बिक जाएँ चाहे सौ फागुन बिक जाएँ पर मैं गंध नहीं बेचूँगा। अपनी गंध नहीं बेचूँगा॥ जिस डाली ने गोद खिलाया जिस कोंपल ने दी अरुणाई लछमन जैसी चौकी देकर जिन काँटों ने जान बचाई इनको पहिला हक आता है चाहे मुझको नोचें तोड़ें चाहे जिस मालिन से मेरी पँखुरियों के रिश्ते जोड़ें ओ मुझपर मँडराने वालो मेरा मोल लगाने वालो जो मेरा संस्कार बन गई वो सौगंध नहीं बेचूँगा। अपनी गंध नहीं बेचूँगा॥ |
- उत्तर लिखिए: (2)
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- निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए (1)
- दुर्गंध × ............
- पराई × ............
- वचन पहचानकर लिखिए: (1)
- काँटे ............
- डाली ............
- निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए (1)
- उपर्युक्त पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
आकलन
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उत्तर
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- दुर्गंध × सौगंध
- पराई × अपनी
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- काँटे - काँटा
- डाली - डालियाँ
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- इन पंक्तियों के माध्यम से कवि अपने अटल स्वाभिमान और नैतिक मूल्यों का परिचय दे रहे हैं। वे कहते हैं कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हो जाएँ, या उन्हें कितना भी बड़ा प्रलोभन (लालच) क्यों न दिया जाए, वे अपने आदर्शों से समझौता नहीं करेंगे। यदि संसार के सभी फूल (सुमन) और पूरा उपवन (बगीचा) ही क्यों न बिक जाए, तब भी वे अपनी ‘गंध’ यानी अपने व्यक्तित्व, स्वाभिमान और ईमानदारी का सौदा कभी नहीं करेंगे। कवि के लिए उनकी गरिमा दुनिया की हर सुख-सुविधा और धन-दौलत से कहीं बढ़कर है।
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