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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर ‘वृंद के दोहे’ कविता का रसास्वादन कीजिए: (१) रचनाकार का नाम। (२) पसंद की पंक्तियाँ। (३) पसंद आने का कारण। (४)कविता की केंद्रीय कल्पना। - Hindi

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प्रश्न

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर ‘वृंद के दोहे’ कविता का रसास्वादन कीजिए:

  1. रचनाकार का नाम।  (१)
  2. पसंद की पंक्तियाँ।  (१)
  3. पसंद आने का कारण।  (२)
  4. कविता की केंद्रीय कल्पना।  (२)
दीर्घउत्तर
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उत्तर

  1. वृंद (पूरा नाम: वृंदावन दास)।
  2. सरसुति के भंडार की, बड़ी अपूरब बात।
    ज्यौं खरचै त्यौं-त्यौं बढ़े, बिन खरचे घटि जात।
  3. संसार में कोई वस्तु ऐसी नहीं है, जो किसी को देने से कम न होती हो। लेकिन ज्ञान का भंडार निराला है। इस ज्ञान को जितना खर्च किया जाए, उतना ही अधिक बढ़ता है। इतना ही नहीं,यदि इसे दूसरों को न दिया जाए और अपने ही पास जमा करके रखा रहने दिया जाए, तो यह नष्ट हो जाता है। इन पंक्तियों से ज्ञान के भंडार की विपुलता तथा उसके विशेष गुण की महत्ता की जानकारी होती है।
  4. प्रस्तुत दोहों में कई नीति-परक बातों की सीख दी गई है। इस तरह कविता की केंद्रीय कल्पना नीतिपरक बातें हैं।
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