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प्रश्न
निम्नलिखित कविता के अंश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
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बाधाएँ आती हैं आएँ |
(क) 'सिर पर ज्वालाएँ बरसने' से क्या आशय है? (1)
- सिर पर आग बरसाना
- सामने कठिनाई होना
- खतरों से खेलना
- सामने आग होना
(ख) सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ - पंक्ति में 'श्लथ' का क्या अर्थ है? (1)
- बेहोश
- ऊर्जावान
- थका हुआ
- पसीना
(ग) 'कदम मिलाकर चलना होगा' - कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाने वाले कथन है/हैं - (1)
- निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा
- जीवन के कष्टों से ना घबराना
- घृणा को सर्वोपरि समझना
- केवल (I)
- केवल (II)
- (I) और (II)
- (II) और (III)
(घ) कवि ने किस प्रकार की विपत्तियों में हँसते-हँसते आगे बढ़ने को बात कही है? (1)
(ङ) कवि ने 'परहित अर्पित अपना तन-मन' क्यों कहा है? अपने विचार प्रकट कीजिए। (2)
(च) कवि ने हमें 'पावस' बनने को क्यों कहा है? (2)
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उत्तर
(क) सामने कठिनाई होना
(ख) थका हुआ
(ग) (I) और (II)
(घ) कवि ने कहा है कि हमें जीवन पथ पर चलते हुए सभी प्रकार की प्रतिकूलताओं में भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना चाहिए। कवि कहता है कि बाधाएँ आएँ तो आने दीजिए, भले ही चारों ओर प्रतिकूलताओं के बादल छा जाएँ, लेकिन हमें विचलित नहीं होना चाहिए।
(ङ) कवि ने कहा है 'परहित अर्पित अपना तन-मन' क्योंकि मानव जीवन केवल अपने लिए नहीं है। परहित यानी परोपकार करने में मनुष्य को परम सुख मिलता है। कवि अपना तन-मन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहता है। कवि ने व्यक्ति से अधिक समाज और राष्ट्र की कल्पना की है।
(च) पावस यानी वर्षा ऋतु धरती को जल से भर देती है और चारों ओर खुशियाँ फैला देती है। किसान से लेकर प्रकृति के सभी तत्व खुश हो जाते हैं। इसी तरह मनुष्य को भी दूसरों के लिए कुछ करने की इच्छा रखनी चाहिए। हमें दूसरों की सेवा और भलाई करनी चाहिए।
