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प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
| पानवाले के लिए यह एक मज़ेदार बात थी लेकिन हालदार साहब के लिए चकित और द्रवित करने वाली। यानी वह ठीक ही सोच रहे थे। मूर्ति के नीचे लिखा ‘मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल’ वाकई कस्बे का अध्यापक था। बेचारे ने महीने भर में मूर्ति बनाकर पटक देने का वादा कर दिया होगा। बना भी ली होगी लेकिन पत्थर में पारदर्शी चश्मा कैसे बनाया जाए-काँचवाला - यह तय नहीं कर पाया होगा या कोशिश की होगी और असफल रहा होगा। या बनाते-बनाते 'कुछ और बारीकी' के चक्कर में चश्मा टूट गया होगा। या पत्थर का चश्मा अलग से बनाकर फिट किया होगा और वह निकल गया होगा। उफ़ .........! |
(क) पानवाले के लिए क्या बात मज़ेदार थी और क्यों? [2]
(ख) हालदार साहब की दृष्टि में कस्बे का अध्यापक ‘बेचारा’ क्यों था? [2]
(ग) हालदार साहब ने नेताजी की प्रतिमा पर चश्मा न होने की क्या-क्या संभावनाएँ व्यक्त कीं? [2]
आकलन
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उत्तर
(क) मास्टर मोतीलाल ने पानवाले के लिए मूर्ति का चश्मा बनाना भूल जाना दिलचस्प था क्योंकि उनका स्वभाव ऐसा था कि उसे ऐसी बातों में मज़ा आता था। देशभक्तों की भावना नहीं थी।
(ख) हालदार साहब ने कस्बे के शिक्षक को “बेचारा” कहा क्योंकि वह इतने कम समय में पत्थर की मूर्ति तो बना दी, लेकिन चश्मे का चुनाव नहीं कर सका। उन पर सीमित समय में काम करना था।
(ग) चश्मा न होने की संभावनाएँ निम्नलिखित हैं-
- काँचवाला तय नहीं कर पाया या कोशिश करने पर असफल रहा होगा।
- कुछ और बारीकियों के चक्कर में चश्मा टूट गया होगा।
- पत्थर का चश्मा अलग से बनाकर फिट किया होगा और वह निकल गया होगा।
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