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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −क्या मीराबाई और आधुनिक मीरा 'महादेवी वर्मा' इन दोनों ने अपने-अपने आराध्य देव से मिलने कि लिए जो युक्तियाँ अपनाई हैं, उनमें आपको कुछ समानता या अतंर प्रतीत होता है?

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
क्या मीराबाई और आधुनिक मीरा 'महादेवी वर्मा' इन दोनों ने अपने-अपने आराध्य देव से मिलने कि लिए जो युक्तियाँ अपनाई हैं, उनमें आपको कुछ समानता या अतंर प्रतीत होता है? अपने विचार प्रकट कीजिए?

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उत्तर

महादेवी वर्मा ने ईश्वर को निराकार ब्रह्म माना है। वे उसे प्रियतम मानती हैं। सर्वस्व समर्पण की चाह भी की है लेकिन उसके स्वरुप की चर्चा नहीं की। मीराबाई श्री कृष्ण को आराध्य, प्रियतम मानती हैं और उनकी सेविका बनकर रहना चाहती हैं। उनके स्वरुप और सौंदर्य की रचना भी की है। दोनों में केवल यही अंतर है कि महादेवी अपने आराध्य को निर्गुण मानती हैं और मीरा सगुण उपासक हैं।

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मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?

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प्रस्तुत कविता में 'दीपक' और 'प्रियतम' किसके प्रतीक हैं?


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दीपक से किस बात का आग्रह किया जा रहा है और क्यों?


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'विश्व-शलभ' दीपक के साथ क्यों जल जाना चाहता है?


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आपकी दृष्टि में 'मधुर मधुर मेरे दीपक जल' कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर है −
(क) शब्दों की आवृति पर।
(ख) सफल बिंब अंकन पर।


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कवयित्री किसका पथ आलोकित करना चाह रही हैं?


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कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन से क्यों प्रतीत हो रहे हैं?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
नीचे दी गई काव्य-पंक्तियों को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए −
जलते नभ में देख असंख्यक,
स्नेहहीन नित कितने दीपक;
जलमय सागर का उर जलता,
विद्युत ले घिरता है बादल!
विहँस विहँस मेरे दीपक जल!

(क) 'स्नेहहीन दीपक' से क्या तात्पर्य है?
(ख) सागर को 'जलमय' कहने का क्या अभिप्राय है और उसका हृदय क्यों जलता है?
(ग) बादलों की क्या विशेषता बताई गई है?
(घ) कवयित्री दीपक को 'विहँस विहँस' जलने के लिए क्यों कह रही हैं?


निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित,
तेरे जीवन का अणु ल गल !


निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल,
प्रियतम का पथ आलोकित कर!


इस कविता में जो भाव आए हैं, उन्हीं भावों पर आधारित कवयित्री द्वारा रचित कुछ अन्य कविताओं का अध्ययन करें; जैसे-
(क) मैं नीर भरी दुख की बदली
(ख) जो तुम आ जाते एकबार
ये सभी कविताएँ ‘सन्धिनी’ में संकलित हैं।


कवयित्री आस्था का दीप किस तरह जलने की अभिलाषा करती है?


विश्व के शीतल-कोमल प्राणी क्या भोग रहे हैं और क्यों ?


विश्व-शलभ को किस बात का दुख है?


कवयित्री ने ‘जलमय सागर’ किसे कहा है? उसका हृदय क्यों जलता है?


कवयित्री अपने जीवन का अणु-अणु गलाकर क्या सिद्ध करना चाहती है?


मेरी निश्वासों से द्रुततर,
सुभग न तू बुझने का भय कर;
मैं अँचल की ओट किए हूँ,
अपनी मृदु पलकों से चंचल !
सहज-सहज मेरे दीपक जल !
सीमा ही लघुता का बंधन,
है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन;
मैं दृग के अक्षय कोषों से
तुझ में भरती हूँ आँसू जल !
सजल-सजल मेरे दीपक जल ! 

इस पद्यांश पर ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर निम्‍न शब्‍द हों।

  1. सीमा = ______ 
  2. आँसू जल = ______ 

मेरी निश्वासों से द्रुततर,
सुभग न तू बुझने का भय कर;
मैं अँचल की ओट किए हूँ,
अपनी मृदु पलकों से चंचल !
सहज-सहज मेरे दीपक जल !

पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्‍तियों का सरल अर्थ लिखिए।


एक शब्‍द में उत्‍तर दीजिए:

माँग रहे तुमसे - ______  


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