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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डHSC Commerce (Hindi Medium) 12th Standard Board Exam [कक्षा १२]

निम्न परिच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर लिखिए: भारत सरकार और सरकार की विभिन्‍न संस्थाएँ हमारी राष्ट्रीय आय की निगरानी और गणना (मापन) अलग-अलग तरीकों से करती हैं जैसे

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प्रश्न

निम्न परिच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर लिखिए:

       भारत सरकार और सरकार की विभिन्‍न संस्थाएँ हमारी राष्ट्रीय आय की निगरानी और गणना (मापन) अलग-अलग तरीकों से करती हैं जैसे कुल उत्पादन विधि, आय और कुल व्यय विधि इत्यादि होता है। इनसे हमें भारत के आर्थिक प्रदर्शन की एक व्यापक तस्वीर मिलती है।

       सन्‌ २००१ से २०२१ के बीच भारत का सकल घरेलू उत्पाद औसतन ६% से ७% की वार्षिक दर से बढ़ा। भारत ने मुख्य रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था से अधिक विविध अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव देखा है। सेवाएँ और औद्योगिक क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद की संरचना में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

       हालांकि यह ध्यान रखना महत्त्वपूर्ण है कि हमारी अर्थव्यवस्था में कई उतार-चढ़ाव व चुनौतियाँ आई हैं। २००८ में वैश्विक वित्तीय संकट और २०२० में कोविड-१९ महामारी ने अस्थायी रूप से आय में वृद्धि की प्रवृत्तिको बाधित किया है ।

       हाल ही के वर्षों में भारत ने आर्थिक विकास के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल शुरू की गई है। इसने आर्थिक गतिविधि और रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। इसका राष्ट्रीय आय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

प्रश्न:

  1. २००१ से २०२१ की अवधि में भारत की औसत वार्षिक विकास दर क्या है? (१)
  2. भारत की राष्ट्रीय आय की वृद्धि प्रवृत्तियों में किन कारकों ने हस्तक्षेप किया? (१)
  3. दिए गए गद्यांश पर अपने विचार लिखिए। (२)
दीर्घउत्तर
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उत्तर

  1. वर्ष २००१ से २०२१ की अवधि के लिए भारत की औसत वार्षिक विकास दर लगभग ६ से ७ प्रतिशत थी।
  2. २००८ का वैश्विक वित्तीय संकट (global financial crisis) और २०२० में कोविड-१९ महामारी वे कारक हैं जिन्होंने भारत की राष्ट्रीय आय (National Income) के विकास के रुझानों (trends) को बाधित किया।
  3. २००१ से, भारत की अर्थव्यवस्था औसतन लगभग छह से सात प्रतिशत की दर से विस्तार (expand) कर रही है। राष्ट्रीय जीडीपी (GDP) के विकास को बढ़ाने के लिए “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” सहित कई पहलें शुरू की गई हैं।
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