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प्रश्न
निम्न गद्यांश को पढ़कर तत्स्थित तथा कृदंत प्रत्यय छाँटों तथा उसका विश्लेषण करके तालिका में लिखो-
एक लकड़हारा था। वह एक दिन लकड़ियाँ बेचने हाट की ओर जंगल के रास्ते निकला। रास्ता पथरीला, कँटीला, टेढ़ा-मेढ़ा और डरावना था। वह दोपहर में थकान के कारण सो गया। कुछ समय के बाद आगे बढ़ा।
वह जब जंगल से गुजर रहा था तो कुछ डाकुओं ने उसे घेर लिया और धमकी दी। वह बोला- "मैं कोई धनवान नहीं हूँ, अपनी कमाई से पेट पालता हूँ।" यह सुनकर डाकू वहाँ से चल पड़े।
| क्र. | शब्द | तद्धित | शब्द | कृदंत | ||
| मूल शब्द | प्रत्यय | मूल शब्द | प्रत्यय | |||
| १. | लकड़हारा | लकड़ी | हारा | थकान | थकना | आन |
| २. | ||||||
| ३. | ||||||
| ४. | ||||||
तालिका पूरा करें
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उत्तर
| क्र. | शब्द | तद्धित | शब्द | कृदंत | ||
| मूल शब्द | प्रत्यय | मूल शब्द | प्रत्यय | |||
| १. | लकड़हारा | लकड़ी | हारा | थकान | थकना | आन |
| २. | कठोरता | कठोर | ता | बेचने | बेचना | ने |
| ३. | डरावना | डर | आना | धमकी | धमक | ई |
| ४. | धनवान | धन | वान | पालत | पालना | त |
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