Advertisements
Advertisements
प्रश्न
नीचे दिए गए चित्र के बारे में स्पष्टीकरण लिखिए।

Advertisements
उत्तर
लोहे की वस्तु पर ज़ंग न लगे इसलिए वस्तु के पृष्ठभाग पर रंग की अपेक्षा अधिक दृढ़ परत देनें की पद्धति को पावडर कोटिंग कहते हैं। इस पद्धति में पॉलिमर रेजिन रंग और अन्य घटक एकत्र करके पिघलाए जाते हैं और फिर ठंडा करके उस मिश्रण का बारीक चूर्ण बनाया जाता है। इलेक्ट्रोस्टेटिक स्प्रेडिपोजिशन (ESD) करते समय धातु के घिसे हुए भाग पर इस पावडर का फौवारा डालते हैं। इसमें पावडर के कणों को स्थिर विदयु् त आवेश दिया जाता है। इस कारण उसकी एक जैसी परत धातु के पृष्ठभाग पर चिपकती है। इसके बाद इस परत के साथ वस्तु को भट्टी में गर्म करते हैं। तब परत में रासायनिक अभिक्रिया होने से अधिक लंबाई के बहुलक जाल निर्मित होते हैं। यह पावडर कोटिंग अत्यंत टिकाऊ, दृढ़ और आकर्षक होती है। दैनिक उपयोग के प्लास्टिक और मीडियम डेन्सिटी फायबर (MDF) बोर्ड पर पावडर कोटिंग की जा सकती है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
कृत्रिम खाद्यरंग के कारण कौन-सी व्याधियाँ होती हैं?
टेफ्लॉन के गुणधर्म लिखिए।
पर्यावरणपूरक रंगपंचमी मनाने के लिए कौन-से प्रकार के रंगों का उपयोग करेंगे? क्यों?
टेफ्लॉन विलेपन जैसी पद्धति का उपयोग खूब क्यों बढ़ा है?
स्पष्टीकरण सहित लिखिए।
पावडर कोटिंग में फौवारा डालते समय पावडर कणों को विद्युत आवेश दिया जाता है।
स्पष्टीकरण सहित लिखिए।
एनोडीकरण में एल्युमीनियम की वस्तु को धनाग्र के रूप में लिया जाता है।
स्पष्टीकरण सहित लिखिए।
स्पेस शटल के बाहर की परत पर विशिष्ट सिरामिक टाइल्स लगाए जाते हैं।
कृत्रिम खाद्य रंग व उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थों के नाम लिखकर उनके दुष्परिणाम लिखिए।
उपयोग लिखिए।
पावडर कोटिंग
दुष्परिणाम लिखिए।
दुर्गंधनाशक
