Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर लगभग 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख भी लिखिए:
|
नदी के किनारे पेड़ − कौए का घोंसला − कोटर में एक सर्प − साँप का कौए के बच्चों को खाना − लाचारी − नदी पर स्नान के लिए राजकुमारी का आना − सोने का हार किनारे पर रखना − कौए का हार उठाकर साँप के बिल में रख देना − सेवकों का हार ढूँढ़ना − साँप को लाठी से मार-भगाना − कौए का खुशहोना। |
Advertisements
उत्तर
चतुर कौआ और साँप
वृंदावन में यमुना नदी के किनारे एक पुराने बरगद के पेड़ पर कौओं का एक जोड़ा रहता था। उसी पेड़ के तने में एक बड़ा सा कोटर (छेद) था, जिसमें एक सर्प ने अपना निवास बना रखा था। जब कभी कौओं का जोड़ा भोजन की तलाश में बाहर जाता, तभी वह साँप उनके नन्हें बच्चों को खा जाता। यह देख वे बहुत दुखी हो गए, परंतु शक्तिहीन होने के कारण कुछ कर नहीं पाए।
एक दिन वहाँ की राजकुमारी अपनी सखियों के साथ यमुना नदी में स्नान करने आई। उसने अपने अन्य सामान के साथ एक सोने का हार भी किनारे पर रख दिया। कौए ने वह हार देखा और उसे उठाकर सर्प के बिल में डाल दिया।
जब राजकुमारी ने स्नान के बाद अपने वस्त्र और गहने लेने शुरू किए, तब हार गायब देखकर वह घबरा गई। उसने अपने सेवकों को तुरंत खोज करने का आदेश दिया। खोज के दौरान सेवकों को वह हार पेड़ की कोटर में दिखा, जहाँ साँप भी मौजूद था। सेवकों ने लाठियों से साँप को मारने की कोशिश की, जिससे डरकर वह वहाँ से भाग गया। उन्होंने हार निकालकर राजकुमारी को लौटा दिया।
इस तरह, कौए ने चतुराई से अपने बच्चों का शत्रु सदा के लिए भगा दिया। अब वे दोनों खुशी से उसी पेड़ पर रहने लगे।
सीख: बुद्धिमानी और युक्ति से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
