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प्रश्न
मेथेनॉल की तुलना में फ़ीनॉल का कार्बन-ऑक्सीजन आबंध थोड़ा-सा अधिक प्रबल क्यों होता है?
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उत्तर
ऐसा इसलिए होता है कि-
(i) फ़ीनॉल में, ऑक्सीजन पर उपस्थित इलेक्ट्रॉन युगल और ऐरोमैटिक वलय के संयुग्मन में होने के कारण कार्बन-ऑक्सीजन आबंध आंशिक द्विआबंध गुण प्राप्त कर लेता है।

मेथेनॉल में ऐसा कोई संयुग्मन (अनुनाद) संभव नहीं है।
(ii) फ़ीनॉल में, ऑक्सीजन sp2 संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है जबकि मेथेनॉल में यह sp3 संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है। ऑक्सीजन और sp2 संकरित कार्बन के मध्य बना आबंध sp3 संकरित कार्बन और ऑक्सीजन के मध्य बने कार्बन की तुलना में अधिक स्थायी होता है।
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