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प्रश्न
| मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! |
पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।
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उत्तर
कवयित्री महादेवी वर्मा दीपक को आश्वस्त करती हैं कि मेरे दीर्घ निश्वासों से तुम नहीं बुझोगे। वे दीपक से कहती हैं कि मैंने तुम्हारी रक्षा के लिए अपनी पलकों से भी चंचल अपने आँचल की आड़ किया है। वे दीपक से सामान्य ढंग से जलने के लिए कहती हैं।
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