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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) ९ वीं कक्षा

मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्‍तियों का सरल अर्थ लिखिए।

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प्रश्न

मेरी निश्वासों से द्रुततर,
सुभग न तू बुझने का भय कर;
मैं अँचल की ओट किए हूँ,
अपनी मृदु पलकों से चंचल !
सहज-सहज मेरे दीपक जल !

पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्‍तियों का सरल अर्थ लिखिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

कवयित्री महादेवी वर्मा दीपक को आश्वस्त करती हैं कि मेरे दीर्घ निश्वासों से तुम नहीं बुझोगे। वे दीपक से कहती हैं कि मैंने तुम्हारी रक्षा के लिए अपनी पलकों से भी चंचल अपने आँचल की आड़ किया है। वे दीपक से सामान्य ढंग से जलने के लिए कहती हैं।

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मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
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अध्याय 1.09: मधुर-मधुर मेरे दीपक जल - स्वाध्याय [पृष्ठ ३९]

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बालभारती Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
अध्याय 1.09 मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
स्वाध्याय | Q (३) | पृष्ठ ३९

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प्रस्तुत कविता में 'दीपक' और 'प्रियतम' किसके प्रतीक हैं?


म्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए
'विश्व-शलभदीपक के साथ क्यों जल जाना चाहता है?


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आपकी दृष्टि में 'मधुर मधुर मेरे दीपक जलकविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर है −
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निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
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कवयित्री आस्था का दीप किस तरह जलने की अभिलाषा करती है?


मेरी निश्वासों से द्रुततर,
सुभग न तू बुझने का भय कर;
मैं अँचल की ओट किए हूँ,
अपनी मृदु पलकों से चंचल !
सहज-सहज मेरे दीपक जल !
सीमा ही लघुता का बंधन,
है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन;
मैं दृग के अक्षय कोषों से
तुझ में भरती हूँ आँसू जल !
सजल-सजल मेरे दीपक जल !

पद्यांश में आए उपसर्ग-प्रत्‍यययुक्‍त शब्‍दों काे ढूँढ़कर लिखिए।


एक शब्‍द में उत्‍तर दीजिए:

लघुता का बंधन - ______ 


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