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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) ९ वीं कक्षा

मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्‍तियों का सरल अर्थ लिखिए।

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प्रश्न

मेरी निश्वासों से द्रुततर,
सुभग न तू बुझने का भय कर;
मैं अँचल की ओट किए हूँ,
अपनी मृदु पलकों से चंचल !
सहज-सहज मेरे दीपक जल !

पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्‍तियों का सरल अर्थ लिखिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

कवयित्री महादेवी वर्मा दीपक को आश्वस्त करती हैं कि मेरे दीर्घ निश्वासों से तुम नहीं बुझोगे। वे दीपक से कहती हैं कि मैंने तुम्हारी रक्षा के लिए अपनी पलकों से भी चंचल अपने आँचल की आड़ किया है। वे दीपक से सामान्य ढंग से जलने के लिए कहती हैं।

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मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
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अध्याय 1.09: मधुर-मधुर मेरे दीपक जल! - स्वाध्याय [पृष्ठ ३९]

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बालभारती Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 9 Maharashtra State Board
अध्याय 1.09 मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!
स्वाध्याय | Q (३) | पृष्ठ ३९

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