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'मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी या हिस्सेदार नहीं' से कवि का क्या अभिप्राय है? - Hindi (Elective)

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प्रश्न

'मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी या हिस्सेदार नहीं' से कवि का क्या अभिप्राय है?

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ऐसे तबके को संबोधित करता है, जो भ्रष्टाचार तथा अनैतिकता में लिप्त हैं। कवि कहता है कि तुम्हें मुझसे डरने या प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि में तुम्हारा प्रतिद्वंद्वी नहीं हूँ। प्राय: अपने प्रतिद्वंद्वी के कारण लोग भयग्रस्त रहते हैं तथा उसे आगे निकलने या उसे गिराने का प्रयास करते हैं। लेखक उन्हें पहले से ही आगह कर देते हैं कि वह इस दौड़ में सम्मिलित नहीं है। अत: उन लोगों को उसे अपना प्रतिद्वंद्वी मानने की भूल नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही जो लोग यह समझते है कि वे भ्रष्टाचार तथा अनैतिकता में इनका साथ देगें और इसमें उनका हिस्सेदार बनेगा, तो यह धारण भी सत्य नहीं है। क्योंकि लेखक इस अनैतिकता तथा भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज़ नहीं उठा सकता है परन्तु इसमें अपनी हिस्सेदारी भी नहीं चाहता है। वह स्वयं को इससे दूर रखना चाहता है। प्रस्तुत पंक्ति में कवि का विरोध तथा कुछ न कर पाने का दुख साफ अभिलक्षित होता है।

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