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मान लीजिए कि f : W → W, f(n) = n - 1, यदि n विषम है तथा f(n) = n + 1, यदि n सम है, द्वारा परिभाषित है | सिद्ध कीजिए कि f व्युत्क्रमणीय है | f का प्रतिलोम ज्ञात कीजिए | यहाँ W समस्त पूर्णांकों का - Mathematics (गणित)

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प्रश्न

मान लीजिए कि f : W → W, f(n) = n - 1, यदि n विषम है तथा f(n) = n + 1, यदि n सम है, द्वारा परिभाषित है | सिद्ध कीजिए कि f व्युत्क्रमणीय है | f का प्रतिलोम ज्ञात कीजिए | यहाँ W समस्त पूर्णांकों का समुच्चय है |

योग
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उत्तर

f(n) = {n - 1, यदि n विषम है n + 1, यदि n सम है} द्वारा परिभाषित है | 

मान लीजिए f(m) = f(n)

जब n विषम और m सम हो तो,

n - 1 = m + 1

n - m = 2

जो की सम्बह्व नहीं है,

इसी तरह यदि n सम तथा m विषम हो तो ऐसा ही पाइनाम प्राप्त होगा। 0 अब यदि दोनों विषम हो तो,

m + 1 = n + 1

m = n

और यदि दोनों विषम हो तो,

n - 1 = m - 1

n = m

अतः f एकाकी है |

अतः स्पष्ट है की सहप्रांत w में स्थित हर विषम संख्या 2r + 1 प्रांत w में स्थित सम संख्या 2r का प्रतिबिम्ब है |

और सहप्रांत w में स्तिथ हर सम संख्या 2r प्रांत w में स्तिथ विषम संख्या 2r + 1 का प्रतिबिम्ब है। मतलब आच्छादक फलन है।

मान लीजिये g : W - W

g(m) = {m - 1, यदि n विषम है, m + 1, यदि n सम है} द्वारा परिभाषित है

जब n सम हो तो,

gof(n) = g(f(n)) = g(n + 1) = n + 1 - 1 = n

जब n विषम हो तो,

fofg(n) = f(g(n)) = g(n - 1) = n - 1 + 1 = n

अतः प्रतिलोमिया फलन है।

तथा f का प्रतिलोम f स्वयं है।

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द्वि-आधारी संक्रियाएँ
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समुच्चय {1, 2, 3, 4, 5} में, निम्नलिखित संक्रिया सारणी द्वारा परिभाषित द्विआधारी संक्रिया * पर विचार कीजिए तथा

(i) (2 * 3) * 4 तथा 2 * (3 * 4) का परिकलन कीजिए।

(ii) क्या * क्रमविनिमेय है?

(iii) (2 * 3) * (4 * 5) का परिकलन कीजिए।

(संकेत : निम्न सारणी का प्रयोग कीजिए।)

* 1 2 3 4 5
1 1 1 1 1 1
2 1 2 1 2 1
3 1 1 3 1 1
4 1 2 1 4 1
5 1 1 1 1 5

मान लीजिए कि समुच्चय {1, 2, 3, 4, 5} में एक द्विआधारी संक्रिया *’, a *’ b = a तथा b का HCF द्वारा परिभाषित है। क्या संक्रिया *’ उर्पयुक्त प्रश्न 4 में परिभाषित संक्रिया * के समान है? अपने उत्तर का औचित्य भी बतलाइए।


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निम्नलिखित प्रकार से समुच्चय {0, 1, 2, 3, 4, 5} में एक द्विआधारी संक्रिया * परिभाषित कीजिए

a * b = `{(a+b","   "यदि"  a+b < 6), (a + b - 6","   "यदि"  a + b ≥ 6):}`

सिद्ध कीजिए कि शुन्य (0) इस संक्रिया का तत्समक है तथा समुच्चय का प्रत्येक अवयव a ≠ 0 व्युत्क्रमणीय है, इस प्रकार कि 6 - a, a का प्रतिलोम है |


समुच्चय {a, b} में द्विआधारी संक्रियाओं की संख्या है |


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