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प्रश्न
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
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लीक पर वे चले जिनके साक्षी हों राह रोके खड़े शेष जो भी हैं- ताड़ के ये पेड़ |
(क) कवि पूर्व निर्मित मार्ग का अनुसरण क्यों नहीं करना चाहता है? (1)
- वह किसी और का अनुचर बनकर रहना चाहता है।
- किसी और के द्वारा निर्मित मार्ग उसे अच्छा नहीं लगता है।
- कवि आत्मविश्वासी है और अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहता है।
- किसी अन्य द्वारा निर्मित मार्ग पर चलना उसे अनुचित लगता है।
(ख) किस तरह के लोग दूसरों के सहारे जीवन जीते हैं? (1)
- जो आज्ञाकारी प्रवृत्ति के होते हैं।
- जो अक्षम और निराश होते हैं।
- जो जल्दी सफल होना चाहते हैं।
- जिनके सपने बहुत बड़े होते हैं।
(ग) बादलों की तुलना किससे की गई है? (1)
- अपनी ही धुन पर थिरकती गायक मंडली से।
- दूसरों की धुन पर थिरकती गायक मंडली से।
- अपनी ही धुन में मग्न नर्तक मंडली से।
- तीव्र गति से नृत्य करती नर्तक मंडली से।
(घ) “हमें तो जो हमारी यात्रा से बने
ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं।” - का आशय स्पष्ट कीजिए। (2)
(ङ) प्रकृति के विविध घटक कवि को क्या प्रेरणा देते हैं? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
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उत्तर
(क) कवि आत्मविश्वासी है और अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहता है।
(ख) जो अक्षम और निराश होते हैं।
(ग) अपनी ही धुन पर थिरकती गायक मंडली से।
(घ) कवि अपनी अनोखी उपलब्धि स्थापित करने की इच्छा रखता है। वह ऐसे लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है, जिसे किसी ने पाया न हो। वह उसी परिश्रम-साधना का पथिक बनना चाहता है। वही उसे प्रिय है।
(ङ) प्रकृति के विविध घटक कवि को यह प्रेरणा देते हैं-
- हमारे मार्ग में रुकावट बने पीले बाँस के झुरमुटों के बीच बहने वाली हवा दिखाई नहीं देती, उसी प्रकार हमारा लक्ष्य भी अदृश्य है। हम उसी को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं, यही हमारा सपना है।
- जिस प्रकार सूखे नाले में निर्मल जल प्रवाह बनकर बहने की इच्छा करता है, उसी तरह हमारा विश्वास संकल्प में बदल रहा है। इसी आशा से हम एक नए मार्ग पर चलते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता तैयार कर रहे हैं।
