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क्या तुम्हें इतना शोर अच्छा लगता है? क्यों? - Environmental Studies (पर्यावरण अध्ययन)

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प्रश्न

क्या तुम्हें इतना शोर अच्छा लगता है? क्यों?

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

इतना शोर मुझे अच्छा नहीं लगता, बल्कि इसमें सर में दर्द हो जाता है।

shaalaa.com
यहाँ से वहाँ
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अध्याय 11: यहाँ से वहाँ - यहाँ से वहाँ [पृष्ठ ७७]

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एनसीईआरटी Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 3
अध्याय 11 यहाँ से वहाँ
यहाँ से वहाँ | Q 4. | पृष्ठ ७७

संबंधित प्रश्न

क्या तुम रेलगाड़ी में बैठे हो? कब-कब?


रेलगाड़ी

आओ बच्चों खेल दिखाएँ,

छुक-छुक करती रेल चलाएँ।

सीटी देकर सीट पर बैठो,

एक-दूजे की पीठ पर बैठो।

आगे-पीछे, पीछे-आगे,

लाइन से लेकिन कोई न भागे।

सारे सीधी लाइन में चलना,

दोनों आँखों मीचे रखना।

बंद आँखों से देखा जाए,

आँख खुले तो कुछ न पाए।

तड़क-भड़क, लोहे की सड़क,

यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ।

छुक-छुक, छुक-छुक,

लाइट्स आती, पर कर जाती।

बालू रेत, आलू का खेत,

बाजरा धान, बुड्ढा किसान।

हरा मैदान, मंदिर मकान,

चाय की दुकान.....

पुल पगडंडी, टीले पे झंडी,

पानी का कुंड, पंछी का झुंडा।

झोपड़ी-झाड़ी, खेती-बड़ी,

बादल धुआँ, मोठ कुआँ।

कुएँ के पीछे, बैग बगीचे,

धोबी का घाट, मंगल की हाट।

गाँव में मेला, भीड़ झमेला,

टूटी दीवार, टट्टु सवार...

तो कैसी लगी यह कविता!


इस कविता में 'लोहे की सड़क' किसके कहा गया है?

रेलगाड़ी

आओ बच्चों खेल दिखाएँ,

छुक-छुक करती रेल चलाएँ।

सीटी देकर सीट पर बैठो,

एक-दूजे की पीठ पर बैठो।

आगे-पीछे, पीछे-आगे,

लाइन से लेकिन कोई न भागे।

सारे सीधी लाइन में चलना,

दोनों आँखों मीचे रखना।

बंद आँखों से देखा जाए,

आँख खुले तो कुछ न पाए।

तड़क-भड़क, लोहे की सड़क,

यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ।

छुक-छुक, छुक-छुक,

लाइट्स आती, पर कर जाती।

बालू रेत, आलू का खेत,

बाजरा धान, बुड्ढा किसान।

हरा मैदान, मंदिर मकान,

चाय की दुकान.....

पुल पगडंडी, टीले पे झंडी,

पानी का कुंड, पंछी का झुंडा।

झोपड़ी-झाड़ी, खेती-बड़ी,

बादल धुआँ, मोठ कुआँ।

कुएँ के पीछे, बैग बगीचे,

धोबी का घाट, मंगल की हाट।

गाँव में मेला, भीड़ झमेला,

टूटी दीवार, टट्टु सवार...


कविता में रेलगाड़ी कहाँ-कहाँ से होकर गई है? सूचि बनाओ।

रेलगाड़ी

आओ बच्चों खेल दिखाएँ,

छुक-छुक करती रेल चलाएँ।

सीटी देकर सीट पर बैठो,

एक-दूजे की पीठ पर बैठो।

आगे-पीछे, पीछे-आगे,

लाइन से लेकिन कोई न भागे।

सारे सीधी लाइन में चलना,

दोनों आँखों मीचे रखना।

बंद आँखों से देखा जाए,

आँख खुले तो कुछ न पाए।

तड़क-भड़क, लोहे की सड़क,

यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ।

छुक-छुक, छुक-छुक,

लाइट्स आती, पर कर जाती।

बालू रेत, आलू का खेत,

बाजरा धान, बुड्ढा किसान।

हरा मैदान, मंदिर मकान,

चाय की दुकान.....

पुल पगडंडी, टीले पे झंडी,

पानी का कुंड, पंछी का झुंडा।

झोपड़ी-झाड़ी, खेती-बड़ी,

बादल धुआँ, मोठ कुआँ।

कुएँ के पीछे, बैग बगीचे,

धोबी का घाट, मंगल की हाट।

गाँव में मेला, भीड़ झमेला,

टूटी दीवार, टट्टु सवार...


नीचे लिखी जगहों पर अपने घर से कैसे जाना चाहोगे? वाहन का नाम डिब्बे में लिखो।


यात्रा में तुम खुद को सुरक्षित कैसे रखते हो?


बड़ो से पूछ कर पता लगाओ - आज से पचास साल पहले लोग कैसे आते-जाते थे? क्या तब भी यही सब साधन थे?


क्या तुम अनुमान लगा सकते हो कि बिस साल बाद लोग आने-जाने के लिए किस- किस तरह के वाहन का प्रयोग करेंगे? अपने घर के लोगों और दोस्तों से पूछ कर दी गई तालिका भरो।

किससे पूछा क्या कहा
स्वयं से (मैं)  
दोस्त  
चाचा  
शिक्षिका  
   

अगर कोई छुकछुक की आवाज़ करे तो तुम झटपट पहचान ही जाते हो कि वे रेलगाड़ी के लिए कह रहें हैं। क्या तुम इन [आवाजों से वाहन को पहचान सकते हो? लिखों।

छुक-छुक  रेलगाड़ी
पौं-पौं  
घर्र-घर्र  
पीं-पीं  
टप-टप  
ट्रिन-ट्रिन  

ऊपर के खानों को देखकर नीचे उन्हें क्रम से बनाओ और रंग भरो। देखो क्या बनता है ! उसका नाम भी लिखो।


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