Advertisements
Advertisements
प्रश्न
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| ______ | ______ | अमिलाम | उत्तमः | लङ् |
Advertisements
उत्तर
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| अमिलम् | अमिलाव | अमिलाम | उत्तमः | लङ् |
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
सर्वं व्याप्नोति सलिलं शर्करा लवणं यथा।
एवं मानवताधर्मो धर्मान् व्याप्नोति सर्वथा।।
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
सकला नद्यः कं प्रविशन्ति ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
सङ्गीते स्वराः कीदृशाः ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
कः सर्वधर्मान् व्याप्नोति ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
भानुः कं प्रकाशयति ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
कां भज इति कविः वदति ?
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
भानुर्भुवनमण्डलम् = ______ + भुवनमण्डलम् ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
व्यवहरेल्लोके = ______ + लोके ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
एषोऽभ्युदयकृत् = एषः + ______।
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
सर्वधर्मान् परित्यज्य ध्रुवं मानवतां भज । (पूर्वकालवाचकं निष्कासयत।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
नद्यः महोदधिं प्रविशन्ति ।
(कर्तृपदम् एकवचने परिवर्तवत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
सर्वे धर्माः मानवतागुणं शंसन्ति ।
(कर्मवाच्ये परिवर्तयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
भानुः भुवनमण्डलं प्रकाशयति ।
(णिजन्तं निष्कासयत ।)
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
कदा मानवता भवेत्?
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
' मानवताधर्मः ' इति काव्यस्य आधारेण मानवताधर्मस्य वर्णनं कुरुत ।
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| नर्तिष्यति | ______ | ______ | प्रथमः | लुट् |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ऋत्विग्भ्याम् | ______ | तृतीय |
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ मम, राजा, एतौ, साधवः)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - मनसा, अस्याः, प्राणान्, अयम्)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मज्जूषा - इमानि, शब्देषु, एतया, बाल्ये)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - त्यजतु, हतः, अब्रूत, पीतः)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ भेतव्यम्, जानाति, ददाति, मुक्तः)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - अददात्, क्रुद्धः, प्रजायते, दृश्यम्)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - याचते, श्रवणीयम्, प्रदत्तवान्, शिक्षयाति)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मज्जूषा ~ रमणीयम्, श्रयेत्, प्राप्ता, भुङ्क्ते)
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ______ | स्रग्भ्य: | चतुर्थी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| दिशि | ______ | ______ | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | श्रेष्ठिनौ | ______ | प्रथमा |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| धाम्ना | ______ | ______ | तृतीय |
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
एकीभूय यथा सर्वे वर्णा गच्छन्ति शुक्लताम्।
तथा सम्भूय शंसन्ति धर्मा मानवतागुणम्।।
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
षड्जमूला यथा सर्वे सङ्गीते विविधाः स्वराः।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्माः समाश्रिताः।।
माघ्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
यथैव सकला नद्य: प्रविशन्ति महोदधिम्।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्मा: समाश्रिताः॥
