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कृति पूर्ण कीजिए: सुरेश के कार्य - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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प्रश्न

कृति पूर्ण कीजिए:

सारिणी
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उत्तर

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अध्याय 1.7: दो लघुकथाएँ - स्‍वाध्याय [पृष्ठ २६]

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बालभारती Hindi (Composite) Lokvani [English] Standard 10 Maharashtra State Board
अध्याय 1.7 दो लघुकथाएँ
स्‍वाध्याय | Q (३) | पृष्ठ २६

संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

“यार सुरेश ?” अशोक ने अपने पारिवारिक मित्र से बड़े अचरज से पूछा, मैं हमेशा देखता हूँ, तुम अपनी सौतेली माँ की
दिन-रात सेवा करते रहते हो, लेकिन वह तुम्हें हमेशा बुरा-भला ही कहती है। बड़ी अजीब बात है, हमारे तो बस का काम नहीं है इतना सुनना, तुम कैसे कर लेते हो इतना सब्र ?” "करना पड़ता है भाई।” सुरेश ने फीकी मुस्कान से कहा, “इन्वेस्टमेंट सेंटर चलाता हूँ न, बाहर पैसे का इन्वेस्टमेंट करवाता हूँ और घर में संस्कारों का इन्वेस्टमेन्ट कर रहा हूँ।“संस्कारों का इन्वेस्टमेंट, वह कैसे ?”
“बचपन में मैंने परिजनों को बुजुर्गों की सेवा करते देखा । इसी भाव का इन्वेस्टमेन्ट अब अपने बच्चों में कर रहा हूँ।”

(1) उत्तर लिखिए:  (2)

(क) सौंतैली माँ का सुरेश के साथ व्यवहार ______।

(ख) सुरेश का सौतेली माँ के प्रति व्यवहार” ______।

(2) परिच्छेद से ढूँढ़कर लिखिए:   (2)

(ग) दो प्रत्यय युक्त शब्द ______।

(घ) दो विदेशी शब्द ______।

(3) 'बड़े-बुजुर्ग ही बच्चों के आदर्श' पर अपने विचार लिखिए।   (2)


‘व्यवहार से संस्‍कार छलकते हैं’, इस विधान काे सोदाहरण स्‍पष्‍ट कीजिए।


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