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"जब गांधीजी जीवित थे, हम अपनी गुत्थियों को सुलझाने के लिए प्राय: उनके पास पहुँचा करते थे। परन्तु आज वह स्थूल रूप में हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं। - Hindi Course - B

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प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए: 

"जब गांधीजी जीवित थे, हम अपनी गुत्थियों को सुलझाने के लिए प्राय: उनके पास पहुँचा करते थे। परन्तु आज वह स्थूल रूप में हमारे बीच विद्यमान नहीं हैं। हमको अब पथ-निर्देश के लिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनके सिखाए सुन्दर उसूलों का आश्रय लेना होगा।” उपर्युक्त शब्द 30 अप्रैल, 1948 को गांधीजी के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए श्री गोविन्दवल्लभ पंत ने रेडियो में प्रसारित एक भाषण के दौरान कहे थे। पंत जी ने कहा सत्य और अहिंसा गांधीजी के जीवन का मूल मंत्र था। उन्होंने मूलतः इन्हीं दो उसूलों पर भारत की स्वतंत्रता के महल को खड़ा करने में खून-पसीना एक किया और जो सफलता उन्हें प्राप्त हुई वह अपूर्व है । गांधीजी का यह विश्वास था कि कोई भी सरकार तब तक लोकप्रिय नहीं हो सकती जब तक कि आधारत: इन दो सिद्धांतों का पालन न करे। सत्य और अहिंसा भारत की संस्कृति की आधारशिलाएँ हैं। हमारे पूर्वजों में से महावीर व बुद्ध प्रभृति बहुत से महापुरुषों ने अपनी शिक्षाओं में इन सिद्धांतों को सर्वोपरि स्थान दिया है। इन्हीं सिद्धांतों को व्यापक रूप देने और एक वृहद्‌ मानव समुदाय के कष्ट निवारण के लिए उनको प्रयोग करने का श्रेय महात्माजी को ही है। परन्तु उनकी अहिंसा कायर की लाचारी का अन्तिम अस्त्र नहीं थी। उनकी अहिंसा उन बलवानों की अहिंसा है, जो किसी सदुद्देश्य के लिए करने या मरने में विश्वास रखते हैं। पश्चिम देशों ने गत दो महायुद्धों से कोई पाठ ग्रहण नहीं किया, जबकि इनसे विश्व को न केवल सामान की क्षति, बल्कि करोड़ों जान का नुकसान भी उठाना पड़ा है। ये राष्ट्र अब भी एक-दूसरे के विरुद्ध घृणा और संदेह का बीजारोपण कर रहे हैं। अभी समय है कि विश्व बापू की शिक्षाओं से शान्ति, भाईचारे और साम्प्रदायिक ऐक्य का पाठ ग्रहण करे।
  1. 'जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पथ-निर्देश के लिए गांधीजी के द्वारा सिखाए उसूलों का आश्रय लेना होगा।' -पंत जी द्वारा ऐसा क्यों कहा गया?    [1]
    1. गांधीजी विश्व प्रसिद्ध व्यक्ति थे
    2. गांधीजी आज हमारे बीच जीवित नहीं हैं
    3. गांधीजी की शिक्षाओं से ही विश्व में शांति संभव है
    4. गांधीजी ने देश को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए मार्ग प्रशस्त किया
  2. गांधीजी द्वारा स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किन जीवन-मूल्यों को महत्व दिया?   [1]
    1. सत्य और अहिंसा
    2. त्याग और बलिदान
    3. संयम और उदारता
    4. संघर्ष और वीरता
  3. संदर्भ के अनुसार गद्यांश में 'प्रभृति' शब्द का सटीक अर्थ हो सकता है।   [1]
    1. बड़े 
    2. बुद्धिमान 
    3. विद्वान
    4. आदि/इत्यादि
  4. सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को व्यापक और व्यावहारिक रूप दिया।   [1]
    1. बुद्ध ने
    2. गांधी ने
    3. महावीर ने
    4.  पंत ने
  5. गद्यांश के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं, सही उत्तर के लिए उचित विकल्प चुनकर लिखिए:    [1]
    1. सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही सरकार लोकप्रियता प्राप्त कर सकती है
    2. युद्ध जन-धन की क्षति का कारक है
    3. अहिंसा कायर की विवशता का अस्त्र है

विकल्पः

  1. केवल कथन (i) सही हैं
  2. कथन (i) और (ii) सही हैं
  3. कथन (ii) और (iii) सही हैं
  4. कथन (i), (ii) और (iii) सही हैं
आकलन
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उत्तर

  1. गांधीजी की शिक्षाओं से ही विश्व में शांति संभव है
  2. सत्य और अहिंसा
  3. आदि/इत्यादि
  4. गांधी ने
  5. कथन (i) और (ii) सही हैं।
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