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प्रश्न
जातीय-क्षेत्र संबंध में समाश्रयण (रिग्रेशन) की ढलान का क्या महत्त्व है?
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उत्तर
जर्मनी के महान प्रकृतिविद् व भूगोलशास्त्री अलेक्जैंडर वॉन हम्बोल्ट ने दक्षिणी अमेरिका के जंगलों में गहन अन्वेषण के बाद जातीय समृद्धि तथा क्षेत्र के मध्य संबंध स्थापित किया। उनके अनुसार कुछ सीमा तक किसी क्षेत्र की जातीय समृद्धि अन्वेषण क्षेत्र की सीमा बढ़ाने के साथ बढ़ती है। जाति समृद्धि और वर्गकों की व्यापक किस्मों के क्षेत्र के बीच संबंध आयताकार अतिपरवलय (रेक्टेंगुलर हाइपरबोल) होता है। यह लघुगणक पैमाने पर एक सीधी रेखा दर्शाता है। इस संबंध को निम्नांकित समीकरण द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है –
log S = log C + Z log A
जहाँ पर S = जाति समृद्धि, A = क्षेत्र,
Z = रेखीय ढाल (समाश्रयण गुणांक रिग्रेशन कोएफिशिएंट)
C = Y-अंत: खंड (इंटरसेप्ट)

पारिस्थितिक वैज्ञानिकों के अनुसार Z का मान 0.1 से 0.2 परास में होता है। यह वर्गिकी समूह अथवा क्षेत्र पर निर्भर नहीं करता है। आश्चर्यजनक रूप से समाश्रयण रेखा (रिग्रेसन लाइन) की ढलान एक जैसी होती है। यदि हम किसी बड़े समूह के जातीय क्षेत्र संबंध जैसे- संपूर्ण महाद्वीप का विश्लेषण करते हैं, तब ज्ञात होता है कि समाश्रयण रेखा की ढलान तीव्र रूप से तिरछी खड़ी होती है। Z के मान की परास (range) 0.6 से 1.2 होती है।
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