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इस निबंध में किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और उसके कर्तव्य की बात की गई है। आपकी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार और कर्तव्य दिए गए

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प्रश्न

इस निबंध में किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और उसके कर्तव्य की बात की गई है। आपकी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार और कर्तव्य दिए गए हैं। उसे पढ़कर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।

विस्तार में उत्तर
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उत्तर

भारतीय संविधान के आरंभिक पृष्ठों में वर्णित मौलिक अधिकार और कर्तव्य प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र की आधारशिला माने जाते हैं। ‘मैं और मेरा देश’ निबंध यह संदेश देता है कि किसी राष्ट्र की प्रतिष्ठा उसके नागरिकों के व्यवहार और आचरण पर निर्भर करती है।

जब हम कक्षा में इस विषय पर विचार-विमर्श करते हैं, तो निम्नलिखित पहलू सामने आते हैं:

  • अधिकार एवं कर्तव्य का संतुलन: संविधान हमें समानता, स्वतंत्रता तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है, किंतु इन अधिकारों की रक्षा तभी संभव है जब हम अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें।
  • राष्ट्रीय संपत्ति का संरक्षण: निबंध में सार्वजनिक संपत्ति को क्षति न पहुँचाने पर जो बल दिया गया है, वह वास्तव में हमारे मौलिक कर्तव्यों की भावना को ही दर्शाता है।
  • विविधता में एकता: वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना तथा देश की सांस्कृतिक विरासत का आदर करना हमारा दायित्व है, जो राष्ट्र के ‘सौंदर्य-बोध’ को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।

निष्कर्षतः अधिकार हमें सामर्थ्य प्रदान करते हैं, जबकि कर्तव्य हमें उत्तरदायी नागरिक बनाते हैं। जब हम योग्य व्यक्ति को अपना मत देते हैं या सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखते हैं, तब हम अपने संवैधानिक दायित्वों का सही अर्थों में पालन कर रहे होते हैं।

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अध्याय 7: मैं और मेरा देश - अभ्यास [पृष्ठ १३३]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
अध्याय 7 मैं और मेरा देश
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १३३
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