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इस अध्याय (भारतीय संविधान में अधिकार) में उद्धृत सोमनाथ लाहिड़ी द्वारा संविधान-सभा में दिए गए वक्तव्य को पढ़ें। क्या आप उनके कथन से सहमत हैं? यदि हाँ तो इसकी पुष्टि में कुछ उदाहरण - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

इस अध्याय (भारतीय संविधान में अधिकार) में उद्धृत सोमनाथ लाहिड़ी द्वारा संविधान-सभा में दिए गए वक्तव्य को पढ़ें। क्या आप उनके कथन से सहमत हैं? यदि हाँ तो इसकी पुष्टि में कुछ उदाहरण दें। यदि नहीं तो उनके कथन के विरुद्ध तर्क प्रस्तुत करें।

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उत्तर

सोमनाथ लाहिड़ी के प्रस्तुत कथन से हम कम ही सहमत हैं क्योंकि अधिकारों में जो दिया गया है उसे वापस भी ले लिया गया है। प्रत्येक अधिकार के बाद एक उपबन्ध शामिल कर दिया गया है जो अधिकार को वापस ले लेता है; जैसे-अनुच्छेद 19 में दिए गए अधिकार में जितनी स्वतन्त्रताएँ दी गई हैं उतने ही बन्धन भी लगा दिए गए हैं। परन्तु इसका आशय यह नहीं है कि संविधान को एक सिपाही का भी निर्वाह करना है। प्रस्तुत अध्याय में नागरिकों के अधिकार दिए गए हैं जिनसे उनका सामाजिक, राजनीतिक, नागरिक, सांस्कृतिक व शैक्षणिक अधिकार सम्भव हुआ है। हाँ, भारतीय नागरिकों को प्रदान किए गए अधिकार निरपेक्ष अर्थात् नियन्त्रणहीन (Absolute) नहीं हैं क्योंकि हमारा देश अभी विकासशील देश है, कुछ बन्धनों के साथ ही अधिकार सम्भव हैं।

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भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार
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अध्याय 2: भारतीय संविधान में अधिकार - प्रश्नावली [पृष्ठ ५०]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 11
अध्याय 2 भारतीय संविधान में अधिकार
प्रश्नावली | Q 9. | पृष्ठ ५०
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