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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर दिए गए संकेत-बिन्दुओं के आधार पर लगभग 200 से 250 शब्दों में निबंध लिखिए-
ग्लोबल वार्मिंग और जन-जीवन
- ग्लोबल वार्मिंग का अभिप्राय
- ग्लोबल वार्मिंग के कारण
- ग्लोबल वार्मिंग से हानियाँ
- बचाव के उपाय
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उत्तर
ग्लोबल वार्मिंग और जन-जीवन
ग्लोबल वार्मिंग एक विकराल संकट है, जो आज विश्व को परेशान कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में विचित्र जलवायु परिवर्तन हो रहे हैं। हिंदी में ग्लोबल वार्मिंग को ‘भूमंडलीय ताप में वृद्धि’ कहते हैं। वास्तव में, पृथ्वी का सारा वातावरण एक “ओजोन” परत से सुरक्षित है, लेकिन वायुमंडल के प्रदूषण से उस परत में दरार हो गई है। “ग्लोबल वार्मिंग” शब्द वैश्विक तापमान में वृद्धि को इंगित करता है, जो इस छेद से निकलने वाली पराबैंगनी (अल्ट्रा-वायलेट) किरणों से होता है। “ग्लोबल वार्मिंग” कई कारणों से बढ़ता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग जनसंख्या के साथ बढ़ता जा रहा है। मानव द्वारा संचालित व्यापारिक क्रियाएँ, जैसे उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआँ
घरों में कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड दोनों गैसों का उपयोग होता है। इन गैसों को अक्सर फ्रिज और एसी में प्रयोग किया जाता है ताकि पानी और वातावरण को ठंडा किया जा सके. हालांकि, जब ये गैस वातावरण में मिल जाती हैं, तो उनका प्रभाव उल्टा होता है। क्योंकि इसमें ऐसे पदार्थ होते हैं जो वातावरण में रेडियोएक्टिवता बढ़ाते हैं, यह वातावरण को ठंडा करने की जगह पर गर्म कर देता है।
ग्लोबल वार्मिंग लगातार बढ़ रहा है क्योंकि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग का स्तर लगातार बढ़ रहा है क्योंकि जंगलों की कटाई, फैक्ट्रियों और कारखानों से निकलने वाला धुआँ, बढ़ती हुई जनसंख्या और वाहनों से निकलने वाला धुआँ सबसे बड़ी वजह हैं।
ग्लोबल वार्मिंग से बड़े-बड़े हिमखंड पिघल रहे हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई देशों में बाढ़ आती है, जो बहुत से लोगों को मार डालती है। इसके खतरों में कई त्वचा संबंधी रोगों का जन्म भी शामिल है। विभिन्न ऋतु परिवर्तनों से फसलों की उपज में कमी और गर्मियों और सर्दी की ऋतुओं में कमी भी एक और बड़ा संकट है।
ग्लोबल वार्मिंग को जनता और सरकार मिलकर रोका जा सकता है। वनों की कटाई पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए। रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना चाहिए और कारों का उपयोग कम होना चाहिए। विकसित देशों में वायु प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैसों को नियंत्रित करके ओजोन परत के अंतर को कम किया जा सकता है। ऐसा न करने पर यह एक और समस्या बन सकता है।
