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प्रश्न
दूसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान औद्योगिक विकास बनाम कृषि विकास का विवाद चला था। इस विवाद में क्या - क्या तर्क दिए गए थे।
संक्षेप में उत्तर
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उत्तर
दूसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान औद्योगिक विकास और कृषि विकास के बिच चले विवाद में निम्नलिखित तर्क दिए गए थे -
- उद्योग और कृषि में से किस क्षेत्र में ज्यादा संसाधन लगाए जाएँ।
- अनेक लोगों का मानना था की दूसरी पंचवर्षीय योजना में कृषि के विकास की रणनीति का अभाव था और इस योजना के दौरान उद्योगों पर जोर देने के कारण खेती और ग्रामीण इलाकों को चोट पहुँची।
- जे. सी. कुमारप्पा जैसे गाँधीवादी अर्थशस्त्रियों ने एक वैकल्पिक योजना का खाका प्रस्तुत किया था जिसमे ग्रामीण औद्योगीकरण पर ज्यादा जोर था। चौधरी चरण सिंह ने भारतीय अर्थव्यस्था के नियोजन में कृषि को केंद्र में रखने की बात बड़े सुविचारित और दमदार ढंग से उठायी थी।
- चौधरी चरण सिंह कांग्रेस में थे और बाद में उससे अलग होकर उन्होंने भारतीय लोक दाल पार्टी बनाई। उनहोंने कहा की नियोजन से शहरी और औद्योगिक तवके समृद्ध हो रहे है और उसकी कीमत किसानों और ग्रामीण जनता को चुकानी पड रही है।
- कई अन्य लोगों का सोचना था की औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर को तेज किए बगैर गरीबी के मकड़जाल से छुटकारा नहीं मिल सकता। इन लोगों का तर्क था की भारतीय अर्थव्यवस्था के नियोजन में खाद्यान्न के उत्पादन को बढ़ाने की रणनीति आवश्यक ही अपनायी गई थी। राज्य ने भूमि - सुधार और ग्रामीण निर्धनों के बीच संसाधन के बँटवारे के लिए कानून बनाए।
- नियोजन में सामुदायिक विकास के कार्यक्रम तथा सिंचाई परियोजनाओं पर बड़ी रकम खर्च करने की बात मानी गई थी। नियोजन की नीतिया असफल नहीं हुई। दरसल, इनका कार्यान्वयन ठीक नहीं हुआ क्योंकि भूमि - संपन्न तबके के पास सामाजिक और राजनितिक ताकत ज्यादा थी। इसके अतिरिक्त, ऐसे लोगों का एक दलील यह भी थी की यदि सरकार कृषि पर ज्यादा धनराशि खर्च करती तब भी ग्रामीण गरीबी की विकराल समस्या का समाधान न कर पाती।
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