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प्रश्न
[Cr(NH3)6]3+ अनुचुंबकीय है, जबकि [Ni(CN)4]2− प्रतिचुंबकीय, समझाइए क्यों?
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उत्तर
[Cr(NH3)6]3+ का निर्माण: [Cr(NH3)6]3+ आयन में क्रोमियम की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है। क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d54s1 है। संकरण को निम्नलिखित आरेख में दर्शाया गया है –

Cr3+ आयन अमोनिया के छह अणुओं से छह इलेक्ट्रॉन युग्मों को स्थान देने के लिए छह रिक्त कक्षक उपलब्ध कराते हैं। परिणामत: संकुल [Cr(NH3)6]3+ में d2sp3 संकरण होता है तथा यह अष्टफलकीय होता है। संकुल में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति इसके अनुचुंबकीय गुण को स्पष्ट करती हैं।
[Ni(CN)4]2− का निर्माण: [Ni(CN)4]2− में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d है। संकरण को निम्नवत् समझाया जा सकता है –

प्रत्येक संकरित कक्षक सायनाइड आयन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति [Ni(CN)4]2− के प्रतिचुंबकीय व्यवहार की पुष्टि करती है।
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